जागरण संवाददाता, श्रीनगर गढ़वाल: केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने नई शिक्षा नीति को बेहतर बताते हुए कहा कि मातृभाषा में शिक्षण होने से शैक्षिक गुणवत्ता और बढ़ेगी। चीन, कनाडा, जापान, जर्मनी सहित अन्य कई देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह देश विकसित श्रेणी में भी इसीलिए आते हैं क्योंकि इन देशों में शिक्षा मातृभाषा के माध्यम से ही दी जाती है।

प्रो. नौटियाल 'गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और टिकाऊ स्कूलों को बढ़ावा देना' विषय को लेकर गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थी। प्रो. नौटियाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति को गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की ओर से 2022 तक पूर्ण रूप से अमल में लाना है, जिसमें सभी सहयोगी बनें। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में शिक्षकों का महत्व भी ज्यादा है। शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तन की जिम्मेदारी भी शिक्षकों को लेनी होगी।

भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ के शिक्षा विभाग के डीन प्रो. हरिशंकर सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति के लागू होने से छात्रों की दिशा और दशा में भी सुधार आएगा। गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को लेकर उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला। एससीईआरटी उत्तराखंड के बीपी मंडोली ने प्रदेश में आनंदम पाठ्यचर्या पर विशेष रूप से प्रकाश डालते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया। लखनऊ की प्रीति आर कन्नौजिया ने पर्यावरण मित्र और स्कूलों में सतत शिक्षा पर विचार व्यक्त किए। राष्ट्रीय वेबिनार की संयोजक प्रो. रमा मैखुरी ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सहायक होगी। प्रो. सुनीता गोदियाल ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। डा. देवेंद्र सिंह ने आभार व्यक्त किया। डा. सीमा धवन ने वेबिनार का संचालन किया। वेबिनार में प्रो. गीता खंडूड़ी, प्रो. अनिल नौटियाल, डा. रमेश राणा, डा. आशु रोलेट, डा. सिद्धार्थ भी जुड़े रहे।

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