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बदलते पौड़ी गढ़वाल की कहानी: विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

Published: Wed, 04 Nov 2026 03:33 PM (IST)

पौड़ी गढ़वाल शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और कृषि जैसे क्षेत्रों में विकास का नया केंद्र बन रहा है। सरकारी योजनाएं युवाओं ...और पढ़ें

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HighLights

  1. शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन में पौड़ी गढ़वाल का विकास।

  2. स्वरोजगार योजनाओं से युवाओं को मिल रहा संबल।

  3. कृषि, पर्यटन और महिला समूह आत्मनिर्भरता में सहायक।

डिजिटल डेस्‍क, देहरादून। हिमालय की गोद में बसा पौड़ी गढ़वाल आज सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और वीर परंपरा के लिए ही नहीं जाना जा रहा है, बल्कि यह जिला शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नई संभावनाओं का केंद्र बन रहा है। पहाड़ से पलायन की समस्या को दूर करने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं अहम भूमिका निभा रही हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार

पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय और एनआईटी उत्तराखंड जैसे संस्थान युवाओं को उच्च और तकनीकी शिक्षा के अवसर प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही, सरकारी स्कूलों को डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लास से लैस करने का काम भी जोरों पर है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सुधार देखा जा रहा है। श्रीनगर का राजकीय मेडिकल कॉलेज और बेस अस्पताल गढ़वाल क्षेत्र के मरीजों के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र बनकर उभरा है, जहां सरकारी योजनाओं की जानकारी जनप्रतिनिधियों के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाई जा रही है।

सड़क और स्वरोजगार से बदल रही गांव की तस्वीर

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि जीवन रेखा है। गांवों को सड़कों से जोड़ने से किसानों के लिए अपनी फसल बाजार तक पहुंचाना और मरीजों को अस्पताल ले जाना आसान हुआ है। इसके साथ ही, युवाओं को रोजगार के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के जरिए युवाओं को अपना काम शुरू करने के लिए आर्थिक मदद और ट्रेनिंग दी जा रही है।

खेती, पर्यटन और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

पहाड़ की ढलान वाली जमीन पर खेती करने की चुनौतियों के बीच मंडुआ, झंगोरा, दालें और फलों की खेती किसानों के लिए आय का नया जरिया बन रही हैं। पॉली हाउस में सब्जियां उगाने और मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को ट्रेनिंग दी जा रही है।

पर्यटन के क्षेत्र में भी पौड़ी गढ़वाल अपनी एक खास पहचान बना रहा है। यहां के खूबसूरत जंगल, शांत वादियां और कंकालेश्वर महादेव व मां ज्वालपा देवी जैसे धार्मिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। होमस्टे योजना ने स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने का एक नया रास्ता खोला है, जिससे पर्यटक भी पहाड़ की शांत जिंदगी और स्थानीय संस्कृति का आनंद ले रहे हैं। इसके अलावा, महिला स्वयं सहायता समूह स्थानीय उत्पादों, जैसे अचार, पहाड़ी दालें और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

 

 

आत्मनिर्भर पहाड़ की दिशा

पौड़ी गढ़वाल की यह कहानी दर्शाती है कि विकास का अर्थ केवल इमारतें खड़ी करना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन को बेहतर और आत्मनिर्भर बनाना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, खेती और पर्यटन के सम्मिलित प्रयासों से यह जिला एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। यही विकसित और आत्मनिर्भर पौड़ी गढ़वाल की सच्ची तस्वीर है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य की उम्मीद जगाती है।

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