जागरण संवाददाता, कोटद्वार: मौसम जिस तरह के संकेत दे रहा है, उससे स्पष्ट है कि गर्मियों में अग्निशमन कर्मियों को तमाम परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं। दरअसल, कोटद्वार में स्थित अग्निशमन इकाई का कवर एरिया भले ही आधे जनपद तक फैला हो, लेकिन संसाधनों की बात करें तो इकाई के पास न तो अपना स्थाई ठौर है और न ही पर्याप्त संसाधन। आलम यह है कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पांच विकासखंडों में अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने की जिम्मेदारी संभाल रही इस इकाई के पास आज भी कार्मिकों की संख्या वही है, जो दशकों पूर्व थी। बढ़ती आबादी के बाद भी इकाई में पदों का पुनर्गठन नहीं हुआ है। नतीजा, अग्नि दुर्घटनाओं को दौरान कर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ती है।

करीब डेढ़ लाख की आबादी है कोटद्वार क्षेत्र की। यदि बात पूरे दुगड्डा, यमकेश्वर, द्वारीखाल, रिखणीखाल, जयहरीखाल व नैनीडांडा विकासखंडों की करें तो इन विकासखंडों में करीब तीन लाख की आबादी निवास करती है। इन्हीं छह विकासखंडों में होने वाली अग्निदुर्घटनाओं से निपटने की जिम्मेदारी अग्निशमन विभाग की कोटद्वार इकाई के जिम्मे है। स्वाभाविक है कि क्षेत्र बड़ा व विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला है तो संसाधन भी उसी के अनुरुप होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। हालात यह है कि आज भी इन पांचों विकासखंडों में होने वाली अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने का जिम्मा उन्हीं 26 फायरमैन के सिर है, जिनके पद दशकों पूर्व सृजित हुए थे। बताते चलें कि उत्तर प्रदेश शासनकाल में ग्रास्टनगंज में खोह नदी के तट पर केसर ¨हद भूमि में 30 दिसंबर 1989 को दमकल स्टेशन की स्थापना की गई। करीब तीन दशक पूर्व इकाई में जो पद सृजित हुए, आज भी पदों की स्थिति यथावत है। आबादी का ग्राफ तो तेजी से बढ़ा, लेकिन पदों की स्थिति न बढ़ने के कारण चुनौतियों भी आबादी के तेजी से बढ़ते ग्राफ के अनुरुप ही बढ़ती चली गई।

ठंडे बस्ते में प्रस्ताव

विभाग की कोटद्वार इकाई की ओर से जयहरीखाल, द्वारीखाल, रिखणीखाल व यमकेश्वर व नैनीडांडा विकासखंडों में फायर स्टेशन खोले जाने संबंधी प्रस्ताव कई मर्तबा शासन में भेजे गए, लेकिन कोई फायदा नहीं। अलबत्ता, सतपुली व लक्ष्मणझूला में फायर स्टेशन खोले जाने संबंधी प्रक्रिया शासन में इन दिनों जा रही है। यदि शासन से इन दोनों स्थानों पर फायर स्टेशन खाल दिए जाते हैं तो इसका फायदा कोटद्वार इकाई को अवश्य ही मिलेगा।

यह है पदों की स्थिति

पदनाम, सृजित पद, कार्यरत, रिक्त

एफएसओ,1, 0,1

एफएसएसओ, 1,0,1

एलएफएम, 4, 4, 0

एफएम, 26,18,8

चालक,05, 05, 0

एएसआइ (एम),1, 0,1

कुक, 2, 1, 1

स्वीपर,1,1,0

'बड़ा क्षेत्र होने के कारण चुनौतियां तमाम हैं। बावजूद इसके प्रयास यही होता है कि जल्द से जल्द मौके पर पहुंच अग्नि से होने वाली क्षति को कम किया जा सके।

रक्षपाल, अग्निशमन अधिकारी, कोटद्वार'

संदेश : 4 कोटपी 1

कोटद्वार में संचालित अग्निशमन इकाई का कार्यालय, जिसके सिर छह विकासखंडों में अग्निदुर्घटनाओं से निपटने का जिम्मा है।

Posted By: Jagran

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