जागरण संवाददाता, श्रीनगर गढ़वाल: कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट ) को लेकर गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में नई तकनीक पर आधारित एक डेमो यूनिट बनेगी। जैविक कचरे से खाद बनाने की यह सरल और कमल लागत वाली कंपोस्ट पिट तकनीक जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा के वैज्ञानिक प्रो. जेसी कुनियाल ने विकसित की।

शुक्रवार को गढ़वाल विवि आइक्यूएसी और ग्रीन कैंपस कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में आइक्यूएसी सभागार में आयोजित संगोष्ठी में डा. कुनियाल ने इस नई तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विवि आइक्यूएसी प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. आरसी सुंद्रियाल ने इस तकनीक की जानकारी दिए जाने पर कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने विवि के चौरास परिसर में प्रथम चरण के अंतर्गत इस नई तकनीक से कंपोस्ट पिट बनाने को लेकर डेमो यूनिट बनाने को स्वीकृति दी है। विश्वविद्यालय के सिविल अभियंता महेश डोभाल के निर्देशन में यह डेमो यूनिट कार्य करेगी। कचरा प्रबन्धन की इस नई तकनीक को लेकर प्रचार प्रसार भी किया जाएगा। जिससे श्रीनगर नगरपालिका के साथ ही गढ़वाल की अन्य नगरपालिकाएं भी इस नई तकनीक का लाभ लेते हुए कंपोस्ट पिट यूनिट बनाकर कचरा प्रबंधन प्रभावी रूप से कर सकेगी। प्रो. कुनियाल ने संगोष्ठी में बताया कि जैविक कचरे से खाद बनाने की यह सरल और कम लागत वाली तकनीक है जो शून्य से भी कम तापमान से लेकर 50 डिग्री सेंटीग्रेट से अधिक तापमान में कार्य करती है। उन्होंने कहा कि इस मॉडल का सफल प्रयोग हिमाचल के कई शहरों में हुआ है। डा. आलोक सागर गौतम, डा. अरुण जुगरान, प्रो. आरके मैखुरी, डा. बीएस भंडारी, डा. डीके राणा, डा. जेपी मेहता,सिविल अभियंता महेश डोभाल ने भी विचार व्यक्त किए।

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