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24 हफ्तों की हार्ड ट्रेनिंग के बाद देश के 258 बेटे बने अग्निवीर, खुशी से छलकीं सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर की आंखें

Published: Sat, 20 Jun 2026 01:27 PM (IST)

लैंसडौन में 24 हफ्तों की कठिन ट्रेनिंग के बाद आयुष सिंह गुसाई कोर्स 08 के बैच-01 में सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर बने। ...और पढ़ें

HighLights

  1. आयुष सिंह गुसाई सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर का खिताब जीते

  2. 24 हफ्तों की कठिन ट्रेनिंग के बाद मिली सफलता

  3. पिता भी गढ़वाल राइफल्स में सूबेदार रहे

अनुज खंडेलवाल, लैंसडौन। नायक भवानी दत्त जोशी, अशोक चक्र परेड ग्राउंड में बढ़े-चलों, गढ़वालियों, बढ़े-चलों सेना गीत व रेजिमेंटल बैंड की धुनों के बीच 258 अग्निवीरों की छाती पर देशभक्ति धड़क रही थी। इसी हुजूम में से एक एक नाम पुकारा गया तो लैंसडौन की वादियां भी थम गईं - 'अग्निवीर आयुश सिंह गुसाई।

दरअसल, 24 हफ्तों की कठिन ट्रेनिंग के बाद आयुष सिंह ने कोर्स 08 के बैच-01 में सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर बनने का खिताब हासिल किया है। आयुष का नाम सर्वश्रेष्ठ का खिताब मिलने की घोषणा होने के साथ ही उसकी आंखें खुशी से नम हो गई। पौड़ी जनपद के कंदौली गांव निवासी आयुष सिंह गुसाई की सेना में दूसरी पीढ़ी है।

24 हफ्ते की तपस्या

आयुश के लिए अपने कोर्स में सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर बनना सिर्फ एक मेडल नहीं था। 24 हफ्ते की वो तपस्या थी जब शरीर ने जवाब दिया, पर हौसले ने नहीं। बारिश में कीचड़, धूप में पसीना और रातों की थकान... हर मुश्किल को उसने 'जय बद्री विशाल' बोलकर पार किया। परेड के बाद जब आयुश ने वर्दी में मंच पर सलामी ली, तो दर्शक दीर्घा में बैठी उसकी मां अनीता देवी व पिता सूबदेार दिनेश सिंह की आंखें भी भर आईं।

आयुष के पिता गढ़वाल राइफल्स में ही तीसरी गढ़वाल में सूबेदार के पद पर अपनी सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हो चुके है। तालियों की गड़गहाट के बीच आयुष की जुबान खुशी से लड़खड़ा रही थी। आयुष ने बताया की उसने सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का ख्वाव अपने बचपन से ही संजो कर रखा था, अपने पिता की वर्दी ने उसे सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया।

बगल में खड़े पिता सीना तानकर बोले, 'ये मेरा बेटा नहीं, गढ़वाल रेजिमेंट का सिपाही है। बकौल आयुष आज उसके पूरे होने का दिन तो मुकर्रर था, आयुष के उस्ताद बताते है की वो ट्रेनिंग के दौरान हर परेड, हर पीटी, हर टेस्ट में अव्वल रहा।

अनुशासन, ड्रिल, फिजिकल और क्लास - हर जगह उसका नाम टॉप पर कोर्स में रजत पदक हासिल करने वाले अग्निवीर मनवर सिंह के लिए भी शनिवार का दिन उसके जीवन का कभी न भूलने वाला दिन बन गया। मनवर के स्वजन उसकी सफलता का श्रेय गढ़वाल राफल्स की ओर से दी जाने वाली उत्तम क्षेणी की ट्रेनिंग को देते है।

कोर्स 08 के बैच एक में पदक हासिल करने वाले अग्निवीर

  • आयुष सिंह गुसाई - ओवर आल
  • मनवर सिंह - द्वितीय स्थान
  • आर्यन बिष्ट - तीसरा स्थान
  • किरण सिंह नेगी - बेस्ट इन फिजीकल
  • विरेंद्र सिंह थापा - बेस्ट इन फायरिंग
  • हिमांशु - बेस्ट इन ड्रिल

गढ़वाल राइफल्स अपनी उत्तम दर्जो की ट्रेनिंग के लिए भारतीय थल सेना में अपना विशिष्ट मुकाम रखती है। सभी अग्निवीर भविष्य में देश की सुरक्षा के लिए मिलने वाली हर चुनौती से मुकाबला करने के लिए तैयार है। गढ़वाल रेजिमेंट की 135 सालों की शौर्य की परंपरा व विलक्षण बहादुरी को और विख्यात करने में सभी अग्निवीर देश रक्षा के लिए अपनी श्रेष्ठता का सर्वोच्च प्रदर्शन् करेंगे। - ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी, कमांडेंट गढ़वाल राइफल्स लैंसडौन

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