जागरण संवाददाता, कोटद्वार: कोटद्वार में प्रेक्षागृह का सपना देख रहे संस्कृति कर्मियों का सपना जल्द पूरा होगा। इन दिनों प्रेक्षागृह को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कार्यदायी संस्था इसे संबंधित विभाग को जुलाई से पूर्व सौंपने की बात कह रही है।

कभी राजनैतिक उठापटक तो कभी बजट का टोटा। वर्ष 2005 से 'तंत्र' की लेटलतीफी के चलते अधर में लटके प्रेक्षागृह का निर्माण अब पूर्ण होने को है। ध्यान रहे कि नगर में संस्कृति प्रेमियों की मांग पर वर्ष 2005 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 400 सीट की क्षमता वाले प्रेक्षागृह के लिए 1.37 करोड़ की धनराशि स्वीकृति की थी। इसके लिए प्रथम किश्त के रूप में 50 लाख की धनराशि अवमुक्त कर दी गई थी। वर्ष 2006 से चल रहा प्रेक्षागृह का निर्माण अब पूरा होने को है। दरअसल, वर्ष 2007 में सत्ता परिवर्तन के चलते प्रेक्षागृह के निर्माण पर ब्रेक लग गए थे। पिछले पांच साल तक निर्माण पूरी तरह बंद रहा। पुन: राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने पर एक बार फिर प्रेक्षागृह का निर्माण शुरू हो गया। प्रेक्षागृह का निर्माण अंतिम चरण में है। कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग जुलाई से पहले प्रेक्षागृह को संस्कृति विभाग को हस्तांतरित करने की तैयारी में है।

देर से बढ़ी प्रेक्षागृह की लागत

प्रेक्षागृह निर्माण में देरी से इसका सीधा असर इसकी लागत पर पड़ा है। जो निर्माण वर्ष 2005 में 1.80 करोड़ की लागत से होना था। वर्ष 2012 में प्रेक्षागृह के निर्माण में जब कार्यदायी संस्था ने पुनरीक्षित प्राक्कलन भेजा तो निर्माण की लागत 3.64 करोड़ पहुंच गई। शासन ने न सिर्फ उक्त प्राक्कलन को वित्तीय सहमति प्रदान की, बल्कि प्रेक्षागृह के नाम पर 2.68 करोड़ की धनराशि अवमुक्त भी कर दी थी। इन दिनों प्रेक्षागृह में फनि¨शग शुरू हो गई है। अवशेष 96 लाख की धनराशि अवमुक्त होते ही प्रेक्षागृह के अवशेष कार्यों को पूर्ण कर उसे संस्कृति विभाग को सुपुर्द कर दिया जाएगा।

शासन ने पुनरीक्षित प्राक्कलन को वित्तीय स्वीकृति देते हुए धनराशि अवमुक्त कर दी है। अंतिम चरण का निर्माण जोरों पर है। प्रयास है कि जुलाई माह से पूर्व प्रेक्षागृह संस्कृति विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाए।

डीसी पंत, अधिशासी अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग'