जागरण संवाददाता, नैनीताल। कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर सरकार की ओर से घोषित कर्फ्यू में ढील मिलने के बाद शहर की पर्यटन गतिविधियां पटरी पर लौटने लगी है। करीब दो माह से नैनी झील में है बंद पड़ा नौकायन और पंत पार्क में लगने वाले फड़ सोमवार को दोबारा सजे हुए मिले। जिससे रौनक लौट आयी है। शहर में पर्यटन कारोबार धीरे-धीरे ही सही मगर दोबारा शुरू होने से कारोबार में लगे नाव, रिक्शा और फड़ कारोबारी इसको लेकर खुश हैं। हालांकि कारोबारियों में गाइडलाइन को लेकर कोई स्पष्टता नहीं होने के कारण संशय बना हुआ है।

बता दें कि शहर में बढ़ते संक्रमण के मामलों को देखते हुए सरकार की ओर से अप्रैल माह में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया था। जिसके बाद से ही 12 अप्रैल से नैनी झील में नौकायन समेत पंत पार्क क्षेत्र में लगने वाले फड़ भी बंद करा दिए गए। कारोबार ठप होने से पर्यटन से जुड़े काम धंधे में लगे सैकड़ों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा गया। किसी तरह मेहनत मजदूरी कर लोगों ने अपने परिवार का भरण पोषण किया। अब सोमवार से नैनीझील में नौकायन शुरू होने के साथ ही पंत पार्क में फड़ लगने से काफी रौनक नजर आई। कारोबारियों का कहना है कि हालांकि अभी नौकायन और फड़ संचालन के लिए कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं आई है जिसको लेकर जिला प्रशासन से वार्ता की जाएगी।

कोसी रेंज में जल संरक्षण की मुहिम

नैनीताल वन प्रभाग के कोसी रेंज में नदी व झरना तथा पानी की कमी होना बड़ी समस्या रहा है। अब वह विभाग ने इस समस्या के समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। वन विभाग ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चाल खाल, खंती बनाने के अलावा नौलों के संवर्धन की योजना पर काम शुरू किया है।

नैना देवी बर्ड रिजर्व के अंतर्गत कोसी रेंज के विनायक, कुंजखड़क, मनयां, राजधर, गागीखड़क आदि इलाकों में पानी की कमी है। मनयां गांव में पानी के संकट की वजह से ग्रामीण बेहद परेशान रहते हैं। अब वन विभाग ने बारिश के पानी को एकत्र करने की योजना पर काम शुरू किया है। यहां चाल खाल व नौले बनाये जा रहे हैं। जिससे वर्षाकाल में इनमें जल संरक्षण होगा और रिचार्ज जोन भी बनेंगे। वन्य जीवों को भी प्यास बुझाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। कोसी रेंज की वन क्षेत्राधिकारी तनुजा परिहार के अनुसार क्षेत्र में चौड़ी पत्ती के पौधों

इसके अंतर्गत अब बड़े पैमाने पर चाल खाल बनाये जा रहे है। इनमें स्थानीय लोगों को ही रोजगार दिया जा रहा है। तालाबों का भी निर्माण किया जा रहा है। तालाब व अन्य जल संरक्षण कार्यो में स्थानीय लोगों को रोजगार दिया गया है। तालाबों के चारों ओर रिंगाल के साथ चौड़ी पत्ती वाले अंगू, पांगर, देवदार के पौधौ का रोपण किया जा रहा है। इससे मृदा संरक्षण के साथ ही पारिस्थितिक तंत्र व जल चक्र की निरंतरता भी बनी रहेगी। उल्लेखनीय है कि कोसी रेंज का क्षेत्र बड़ी संख्या में दुर्लभ वन्य जीवों का बसेरा है। बर्ड वॉचर्स अक्सर यहां आते रहते हैं। गर्मियों में इस इलाके में पानी की कमी से वन्य जीवों को भटकना पड़ता है। डीएफओ टीआर बीजू लाल का कहना है कि कोसी के साथ ही नैना रेंज में भी जल संरक्षण के काम किये जा रहे हैं। नैना रेंज में किलबरी में बड़ा तालाब भी बनाया गया है।

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Edited By: Prashant Mishra