जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : गौला के उपखनिज की रायल्टी कम करने को लेकर वाहनस्वामी अब एकजुट होने लगे हैं। उनका कहना है कि रायल्टी ज्यादा होने की वजह से उपखनिज महंगा पड़ता है। ऐसे में बाहर से डिमांड कम आ रही है। जिस वजह से उपखनिज के पूरे दाम नहीं मिल पाते। गाड़ी मालिकों का कहना है कि बाजपुर समेत अन्य जगहों पर रायल्टी कम होने के कारण लोग बाहर से रेता व अन्य उपखनिज मंगाने लग गए हैं।

गौला को कुमाऊं की लाइफलाइन कहा जाता है। हर साल अक्टूबर शुरू होते ही खनन कार्य का इंतजार रहता है। क्योंकि, उसके बाद से कुमाऊं के प्रवेशद्वार हल्द्वानी के अधिकांश कारोबार रफ्तार पकड़ते हैं। पहले खनन के मामले में गौला नदी क्रेता और विक्रेता दोनों की निर्भरता रहती थी। जिस वजह से हर कोई गौला के निकासी गेटों से निकाले गए उपखनिज की ही डिमांड करता था। मगर अब बाजपुर क्षेत्र की नदियों की डिमांड ज्यादा हो गई है। जिसके पीछे दो मुख्य वजह है। पहला वहां रायल्टी कम होने के साथ ओवरलोड का चलन भी है।

भारी मात्रा में उपखनिज मंगाने पर किराया भी कम पड़ता है। जबकि गौला में ओवरलोड लाने पर अगले दिन की निकासी ही बंद हो जाती है। ऐसे में गौला संघर्ष समिति और मजदूर समिति अब रायल्टी कम करने को लेकर जोर दे रही है। इनका कहना है कि पूर्व में हाईवे निर्माण में जुटी कंपनी को शासन की तरफ से उपखनिज निकासी के लिए गेट भी खोलकर दिया गया था। मगर रायल्टी महंगी होने के कारण उसने कुछ दिन बाद गेट का संचालन बंद कर दिया था। जिसके बाद बाजपुर व अन्य जगहों पर उपखनिज लाकर काम चलाया गया। ऐसे में सरकार को रायल्टी के पैसे कम करने चाहिए।

Edited By: Skand Shukla