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उत्तराखंड पॉलिटेक्निक प्रवक्ता भर्ती: 527 पदों पर नियुक्ति का रास्ता खुला, सरकार ने बदले नियम

Published: Tue, 06 Oct 2026 05:43 PM (IST)

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पॉलिटेक्निक प्रवक्ता भर्ती से संबंधित याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे 527 पदों पर नियुक्ति ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने पालीटेक्निक के प्रवक्ता पदों पर निर्धारित योग्यता को चुनौती देती याचिका को निस्तारित कर दिया है। कोर्ट में सरकार की ओर से नियम में संशोधन की जानकारी दे दी है।

हाई कोर्ट ने तीन मार्च 2025 में परीक्षा से दो दिन पहले प्रवक्ता पदों पर की लिखित परीक्षा पर रोक लगा दी थी, तब से यह प्रक्रिया रुकी थी। अब कोर्ट के आदेश के बाद 527 प्रवक्ता पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने गढ़वाल के एमके अभ्यर्थी मधुसुदन पैन्युली व अन्य की याचिका पर यह निर्णय दिया है।

सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 27 मार्च 2026 को नियम में संशोधन कर लिया गया है कि अब एआइसीटीई के नियमों के अनुरूप ही भर्ती कराई जाएगी।

पूर्व में जो स्नातक पात्र अभ्यर्थी थे, वह भी इस परीक्षा में सम्मिलित हो सकते थे, परंतु संशोधन के बाद अब लेवल 10 लेक्चरर पर स्नातक के साथ-साथ स्नातकोत्तर की अनिवार्यता भी स्पष्ट रूप से नियम में दर्शा दी गई है, जिसको संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने अब याचिका निस्तारित कर दी।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकार गलत नियमों के तहत भर्ती करा रही है और जहां स्नातकोत्तर अनिवार्य अर्हता है, वहां स्नातक पात्र अभ्यर्थियों को भी शामिल कर रही है।

याचिका में कहा गया था कि उत्तराखंड सरकार की ओर से पॉलिटेक्निक प्रवक्ता पदों के लिए तय योग्यता आल इंडिया काउंसिल फार टेक्नीकल एजुकेशन 2019 के मानकों के विपरीत थी। सुप्रीम कोर्ट का साफ आदेश है कि एआइसीटीई से विपरीत जाकर कोई सरकार या संस्थान तकनीकी शिक्षा के मापदंड तय नहीं सकता।

दरअसल उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से मैकेनिकल, सिविल व इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विषयों में केवल बी-टेक को ही योग्यता मान लिया गया था, जबकि एआइसीटीइ के नियमों के अनुसार बीटेक के साथ ही एमटेक होना जरूरी था। इन पदों के लिए आयोग की ओर से 2014 में विज्ञप्ति जारी की गई थी।

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