जागरण संवाददाता, किच्छा : नामांकन के अंतिम दिन सियासी पारा चढ़ गया। मान मनौव्वल के लंबे चले दौर के बाद भी न तो कांग्रेस और न ही भाजपा संगठन बागियों पर नकेल कस पाया। शिक्षा मंत्री अरङ्क्षवद पांडेय के प्रयास भी सफल नहीं हो पाए। भाजपा और कांग्रेस के बागियों ने अपना नामांकन कर चुनावी ताल ठोकने से सर्द मौसम में भी माहौल गरमा गया है। 

भाजपा और कांग्रेस दोनों में ही टिकट वितरण को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा था। भाजपा द्वारा राजेश शुक्ला को प्रत्याशी बनाने के बाद से ही अजय तिवारी के निर्दल प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकने का ऐलान कर दिया था। शिक्षा मंत्री अरङ्क्षवद पांडेय के साथ ही जिलाध्यक्ष शिव अरोरा को अजय तिवारी को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जिस पर 26 जनवरी को भाजपा के दोनों वरिष्ठ नेताओं ने अजय तिवारी को मनाने का भरसक प्रयास किया।

उसके बाद माना जा रहा था कि अजय तिवारी मान जाएंगे, लेकिन उनके दोबारा ताल ठोकने के बाद शिक्षा मंत्री शुक्रवार सुबह ही अजय तिवारी को नामांकन से रोकने के लिए उनके रुद्रपुर स्थित आवास पर चले गए, परंतु शिक्षा मंत्री के आने की भनक अजय तिवारी को लग गई और वह पहले ही घर से निकल गए। शिक्षा मंत्री अरङ्क्षवद पांडेय के प्रयास भी सफल नहीं हो पाए और शुक्रवार दोपहर अजय तिवारी ने किच्छा पहुंच कर अपने समर्थकों के साथ नामांकन कर दिया। अजय तिवारी को भाजपा नेता राजू भंडारी का करीबी माना जाता है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी तिलक राज बेहड़ का विरोध कर रहे कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री हरीश पनेरु ने भी नामांकन कर सियासी पारा चढ़ा दिया।

शुक्रवार दोपहर उन्होंने भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के समझाने के प्रयास के बाद भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया। किच्छा विधानसभा में 2012 में गठन के बाद से ही लड़ाई लगातार भाजपा और कांग्रेस के बीच हीं रही है। बसपा भी उसे त्रिकोणीय बनाने में नाकाम रही है। 2012 और 2017 में भाजपा और कांग्रेस बागियों पर लगाम कसने में सफल रही थी। लेकिन 2022 मेें दोनों ही प्रमुख दलों से बागियों ने नामांकन कर सियासी पारा चढ़ा दिया है। मान मनोव्वल का पहला दौर विफल रहा। भाजपा और कांग्रेस के सामने आगामी दो दिनों में बागियों को मनाने की बड़ी चुनौती होगी। बागियों पर लकीर खींचने में मिली कामयाबी कहीं न कहीं जीत का मार्ग प्रशस्त करेगी। 

मुख्यमंत्री धामी के तिवारी को मनाने आने की उड़ी चर्चा 

अजय तिवारी के नामांकन के बाद उन्हें मनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर ङ्क्षसह धामी के आने की चर्चाएं तेजी से चली। परंतु शाम होते होते चर्चाओं को विराम लग गया। आने वाले दो दिनों में अजय तिवारी को मनाने के लिए प्रयास की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।

Edited By: Prashant Mishra