जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : बरसात का मौसम जहां गर्मी से सुकून देता है, वहीं कई बीमारियां भी साथ लाता है। इस मौसम में दूषित जल से टायफायड होने का खतरा रहता है, वहीं मच्छरों के प्रकोप से डेंगू, मलेरिया होने का डर। स्क्रब टायफस भी कॉमन समस्या है, जिससे मल्टी आर्गन फेल्योर का खतरा रहता है। डा. वीके सत्यवली बताते हैं, अगर बीमारी हो गई तो तत्काल डाक्टर से परामर्श ले लेना चाहिए। समय पर उपचार से खतरा टल सकता है। डा. सत्यवली राजकीय मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर व एसटीएच में वरिष्ठ फिजीशियन हैं। वह रविवार को दैनिक जागरण के हैलो डाक्टर कार्यक्रम में थे। उन्होंने कुमाऊं भर से फोन करने वाले लोगों को परामर्श दिया।

स्क्रब टायफस में लापरवाही जानलेवा

बरसात के मौसम में स्क्रब टायफस का खतरा भी अधिक रहता है। यह बीमारी जानवरों के पिस्सुओं से फैलती है। जब कई बार बिना कारण से बुखार आने लगे तो यह स्क्रब टायफस भी हाे सकता है। क्लीनिकल एक्जामिनेशन व खून की जांच से बीमारी का पता चलता है। डा. सत्यवली बताते हैं, अगर बीमारी का समय पर इलाज नहीं किया गया तो इसका शरीर के कई अंगों पर इसका प्रभाव देखने को मिलता है। जैसे, फेफेड़े में खराबी, प्लेटलेट्स कम हो जाना आदि। मल्टी आर्गन फेल्योर की नौबत आ जाती है। इसलिए जरूरी है, समय पर परामर्श ले लिया जाए।

ये हैं स्क्रब टायफस के लक्षण

- शरीर में काले रंग के घाव

- तेज बुखार आना

- थकान महसूस होना

डेंगू से बचाव के लिए अपनाए ये तरीका

डेंगू एडिज एज्पिटाइ मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर दिन में ही काटता है और साफ पानी में ही पनपता है। इसलिए जरूरी है बचाव। डा. सत्यवली बताते हैं, अपने अासपास पानी ठहरने न दें। सफाई का ध्यान रखें। पूरा शरीर ढकने वाले कपड़े पहनें। इस बीमारी में शरीर को तोड़ देने वाला बुखार आता है। हड्डी व जोड़ों में दर्द होने लगता है। इलाज के साथ अाराम की जरूरत रहती है। मलेरिया भी मच्छर के काटने से ही फैलता है। इसमें जाड़ा लगने के साथ बुखार आता है।

टायफायड से बचाव को खान-पान में बरतें सावधानी

डा. सत्यवली बताते हैं, टायफायड का कारण दूषित जल व बासी व गंदगी युक्त भोजन है। इस मौसम में यह बीमारी भी कॉमन है। इसलिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। खुले में रखे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। जहां-तहां पानी न पिएं। मच्छर व क्रॉक्रोच जब भोजन में मंडाराते हैं तो उस भोजन को न लें। इससे भी बीमारी का खतरा रहता है।

इन्होंने लिया परामर्श

हल्द्वानी से दिनेश बाेरा, डहरिया से हरीश सिंह मेहरा, विजय कार्की, हल्दूचौड़ से गीता बमेठा, रानीखेत से लीला तिवारी, लालकुआं से जगदीश चंद्र, बागेश्वर से अशोक जोशी, चम्पावत से दिनेश सिंह, पिथौरागढ़ से जीवन चंद्र जोशी, डीडीहाट से गोविंद रावत, खटीमा से मनीष बिष्ट, अल्मोड़ा से पवन पांडेय आदि ने फोन कर परामर्श लिया।

Edited By: Skand Shukla