गणेश जोशी, हल्द्वानी : कोरोना महामारी का ऐसा दौर था। जिसने सभी को आहत कर दिया। संकट के इस काल में तमाम लोगों ने अपनों को खोया तो कुछ लोग लंबे समय तक अस्पताल में उपचार कराते रहे। तात्कालिक रूप से स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव अखरा, लेकिन इसके बाद सरकार ने तमाम ऐसे प्रयास किए। जिसकी वजह से बीते वर्ष स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार देखने को मिला।

डीआरडीओ ने बनाया अस्थायी कोविड अस्पताल

कोरोना महामारी चरम पर थी। महामारी की चपेट में आकर लोग दम तोड़ रहे थे। अस्पतालों में जगह नहीं बची। इलाज पाने के लिए लोग तरस गए। ऐसे में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी परिसर में 500 बेड का अस्थायी कोविड अस्पताल बनवाया। इस अस्पताल का नाम जनरल बीसी जोशी अस्थायी कोविड अस्पताल रखा गया। हालांकि अस्पताल तब तैयार हुआ, जब कोविड का खतरा कम हो गया था। इसमें आइसीयू, वेंटीलेटर, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड के लिए तमाम तरह की हाइटेक मशीनें इंस्टाल की गई। बाद में कुछ मरीज ही इस अस्पताल का लाभ उठा पाए। हालांकि भविष्य के खतरे के लिए इस अस्पताल की सुविधाओं का लाभ लिया जा सकता है। इसमें डाक्टर व स्टाफ की व्यवस्था कालेज ने डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय से की।

आक्सीजन प्लांट व आइसीयू बेड बढ़े

बीते वर्ष में डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में आक्सीजन प्लांट लगे। इसके साथ ही बीडी पांडे नैनीताल, रामनगर चिकित्सालय के अलावा अल्मोड़ा व अन्य जिला अस्पतालों में भी आक्सीजन प्लांट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रत्येक जिला अस्पताल व बेस अस्पताल में इंटेंसिव केयर यूनिट (आइसीयू) तैयार किया गया है।

डाक्टर बढऩे से कुछ हद तक मिली राहत

उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने राज्य में 403 डाक्टरों की नियुक्ति की। इन डाक्टरों को प्रदेश के अलग-अलग अस्पतालों में तैनात किया गया। साथ ही मेडिकल कालेजों में भी अस्थायी तौर पर करीब 50 डाक्टरों की तैनात की गई। हालांकि नर्स, फार्मासिस्ट व अन्य के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकी रही। हालांकि अभी भी राज्य में 30 फीसद से अधिक डाक्टरों की कमी है। एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने बताया कि राज्य में विशेषज्ञ डाक्टरों के 1147 स्वीकृत पदों में से मात्र 493 ही कार्यरत हैं। बाकी 654 पद खाली हैं। इसके लिए और प्रयास किए जाने की जरूरत है।

एमबीबीएस इंटर्न का बढ़ाया वेतन

राज्य के मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस के बाद इंटर्नशिप करने वाले डाक्टरों विद्यार्थियों को 7500 रुपये मानदेय मिलता था। राज्य सरकार ने मानदेय में बढ़ोत्तरी करते हुए 17 हजार रुपये प्रतिमाह किया है।

डाक्टर की पढ़ाई का शुल्क किया कम

बीता वर्ष राज्य में मेडिकल की पढ़ाई करने वालों के लिए खुशखबरी लाया। जहां एमबीबीएस के लिए प्रतिवर्ष शुल्क चार लाख रुपये भुगतान करने को मजबूर थे, वहीं अब यह शुल्क प्रतिवर्ष 1.45 लाख रुपये कर दिया गया है।

राज्य को मिला पूर्णकालिक स्वास्थ्य मंत्री

लंबे समय से राज्य में पूर्णकालिक स्वास्थ्य मंत्री नहीं था। यह विभाग मुख्यमंत्री ने अपने पास रखा था। इसकी वजह से तमाम कार्य प्रभावित रहते थे। कोविड के समय भी दिक्कतें रही। वर्ष 2021 में जब नए मुख्यमंत्री के तौर पर पुष्कर सिंह धामी ने शपथ ली। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय डा. धन सिंह रावत को सौंपा।

आपदा में हेली एंबुलेंस से राहत

18-19 अक्टूबर, 2021 में आई प्राकृतिक आपदा के समय रास्ते बंद हो गए थे। घायलों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो गया था। ऐसे में राज्य सरकार ने कुमाऊं में घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए दो हेली एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई। इससे बड़ी राहत मिली।

महिला अस्पताल में खुला एसएनसीयू

महिला अस्पताल में नवजात के इलाज की सुविधा नहीं थी। बीते वर्ष अस्पताल में सिक नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एसएनसीयू) की स्थापना की गई। इसमें तीन डाक्टर भी तैनात किए गए। हालांकि जरूरत पांच बाल रोग विशेषज्ञों की है। इसके लिए महिला अस्पताल प्रबंधन ने स्वास्थ्य महानिदेशलाय को पत्र भेजा है।

ये रही सुविधा

403 डाक्टरों की नियुक्ति की गई

50 से अधिक डाक्टर मेडिकल कालेज में हुए नियुक्त

02 हेली एंबुलेंस से मरीजों को मिला लाभ

1.45 लाख रुपये प्रतिवर्ष हुआ एमबीबीएस का शुल्क

17 हजार रुपये प्रतिमाह हुआ एमबीबीएस इंटर्न का मानदेय

04 आक्सीजन प्लांट एसटीएच में हुए स्थापित

500 बेड का अस्थायी कोविड अस्पताल बना

Edited By: Prashant Mishra