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दिनेशपुर में 34 किलो के दुर्लभ प्रजाति के पेंगोलिन के साथ तस्कर गिरफ्तार

34 किलो वजनी दुर्लभ प्रजाति के पेंगोलिन की तस्करी कर रहे नानकमत्ता निवासी तस्कर को एसटीएफ और वन विभाग ने गिरफ्तार किया है। वन विभाग ने उसके खिलाफ वन अधिनियम के तहत केस दर्ज कर पूछताछ शुरू कर दी है।

By Skand ShuklaEdited By: Published: Sun, 09 Jan 2022 03:55 PM (IST)Updated: Sun, 09 Jan 2022 04:45 PM (IST)
दिनेशपुर में 34 किलो के दुर्लभ प्रजाति के पेंगोलिन के साथ तस्कर गिरफ्तार

जागरण संवाददाता, रुद्रपुर : 34 किलो वजनी दुर्लभ प्रजाति के पेंगोलिन की तस्करी कर रहे नानकमत्ता निवासी तस्कर को एसटीएफ और वन विभाग ने गिरफ्तार किया है। वन विभाग ने उसके खिलाफ वन अधिनियम के तहत केस दर्ज कर पूछताछ शुरू कर दी है। मामले में कुछ और लोगों के भी नाम प्रकाश में आए हैं, जिनकी वन विभाग और एसटीएफ तलाश कर रही है।

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एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह और तराई केंद्रीय वन प्रभाग के डीएफओ चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि वन्य जीव जंतुओं की तस्करी में शामिल तस्करों की धरपकड़ की जा रही है। इसके तहत रविवार सुबह सूचना मिली कि दिनेशपुर के महतोष मोड़ के पास एक संदिग्ध युवक खड़ा है। उसके पास दुर्लभ प्रजाति की पेंगोलिन भी है और वह उसे बेचने के लिए ग्राहक खोज रहा है। सूचना पर एसटीएफ निरीक्षक एमपी सिंह, वन क्षेत्राधिकारी रूप नारायण गौतम के नेतृत्व में एसटीएफ और वन विभाग की टीम महतोष मोड़ पर पहुंच गई। जहां से टीम ने एक युवक को दबोच लिया, उसकी तलाशी लेने पर 34 किलोग्राम का दुर्लभ प्रजाति का पेंगोलिन बरामद हुआ।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह और तराई केंद्रीय वन प्रभाग के डीएफओ चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि पूछताछ में उसने अपना नाम नानकमत्ता के सिलबाती निवासी सुखविंदर सिंह पुत्र गुरमुख सिंह बताया। बताया कि वह पेंगोलिन को गूलरभोज के साल के जंगल से पकड़कर लाया है। वह उसे बेचने के लिए ग्राहकों की खोजबीन कर रहा था। बाद में आरोपित के खिलाफ वन विभाग ने पीपल पड़ाव रेंज रुद्रपुर में वन्य जीव जंतु संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया। पेंगोलिन तस्करी में दो अन्य लोगों के नाम भी सामने आए है। जिनकी पेंगोलिन की तस्करी में संलिप्तता की जांच की जा रही है।

पेंगोलिन शेडयूल एक दुर्लभ प्रजाति का है जीव

एसटीएफ निरीक्षक एमपी सिंह ने बताया कि पेंगोलिन शेडयूल एक यानी टाइगर के समकक्ष दुर्लभ श्रेणी का जीव है। यह साल के जंगलों में पाया जाता है। बताया कि तराई के गूलरभोज और टांडा जंगल में भी पेंगोलिन पाया जाता है। साल के पेड़ में लगने वाले दीमक में लाल चीटी को खाता है।


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