गोविंद बिष्ट, हल्द्वानी। Mothers Day 2021 : मित्रता, सेवा और सुरक्षा। महिला सब इंस्पेक्टर दीपा जोशी जैसे पुलिसकर्मी उत्तराखंड पुलिस के इस श्लोगन का चरितार्थ करते हैं। खाकी के प्रति जवाबदेही और जिम्मेदारी का जुनून इस कद्र है कि एक साल पहले लॉकडाउन में बड़े बेटे के साथ दुधमुंहोंको भी खुद से 300 किमी दूर गांव में पहुंचा दिया। क्योंकि, कोरोना काल के दौरान पुलिस की नौकरी संदिग्धों व अजनबियों के बीच में गुजरने लगी थी। ऐसे में खुद के साथ परिवार के भी संक्रमित होने का डर था। बस रोज रात को ड्यूटी से लौटने के बाद वीडियो कॉल पर बच्चों का मुस्कुराता चेहरा देख दीपा और उसके पति बंशीधर जोशी खुद के लिए सुकून तलाश लेते हैं।

एसआइ दीपा जोशी कोतवाली से जुड़ी मंगल पड़ाव चौकी में तैनात है। पिछले साल मार्च में लॉकडाउन लगने पर कोरोना को लेकर डर के साथ असमंजस की स्थिति भी थी। तब दीपा का बड़ा बेटा निशांत नौ साल और छोटा बेटा निकुंज महज 14 महीने का था। पति बंशीधर जोशी में महकमे का हिस्सा है।

सुबह ही दोनों घर से ड्यूटी को निकल पड़ते थे। चेकिंग, छापेमारी, कार्रवाई, संदिग्धों से पूछताछ करना पुलिस का काम है। इसलिए संक्रमण का डर ज्यादा रहता। जिस वजह सेे दोनों ने निर्णय लिया कि बच्चों को घर छोड़ा जाएगा। मार्च 2020 में निकुंज और निशांत को पिथौरागढ़ के बाराकोट गांव पहुंचा दिया। उसके बाद से दादी कौशल्या देवी पर बच्चों की परवरिश का जिम्मा है। दीवाली के दौरान सिर्फ एक बार एसआइ दीपा जोशी व पति बंशीधर बच्चों से मिलने गए थे। महामारी की दूसरी लहर का दौर जारी होने के कारण फिलहाल गांव जाने की स्थिति नहीं बन पा रही है। वहीं, बच्चों से दूर होने के बावजूद एसआइ दीपा जोशी बगैर तनाव के पूरी शिद्दत के साथ ड्यूटी में जुटती है। अच्छे व्यवहार की वजह से साथियों के साथ वरिष्ठों का भी पूरा सहयोग मिलता है।

चौकी के साथ 12 घंटे की पिकेट ड्यूटी

वर्तमान समय में कई पुलिसकर्मी भी कोरोना की चपेट में आने लगे हैं। जिस वजह से कई बार चौकियों में स्टाफ की कमी भी हो जाती है। 12 घंटे की पिकेट ड्यूटी के अलावा दीपा बतौर एसआइ चौकी का भी पूरा काम संभालती है। इसके अलावा विवेचना व अन्य विभागीय कामों को लेकर पूरी गंभीरता से पूरा किया जाता है।

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