हल्द्वानी, जागरण संवाददाता : Road Safety with Jagran: सड़क पर होने वाले किसी भी हादसे के बाद सबसे पहले अक्सर पुलिस महकमे के लोग ही पहुंचते हैं। सुरक्षित यातायात और नियमों का पालन करवाने को लेकर सबसे अहम भूमिका खाकी की होती है। कार्रवाई और जागरूकता दोनों ही पुलिस के हिस्से में आते हैं। दैनिक जागरण सड़क सुरक्षा अभियान के दौरान हर विभाग की जिम्मेदारी पर बात की गई थी। सड़क सुरक्षा की अहम कड़ी होने के कारण एसपी ट्रैफिक डा. जगदीश चंद्र से और बेहतर परिणाम को लेकर चर्चा की गई। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश।

सवाल : सड़क पर नियमों के पालन को लेकर लोग जागरूक क्यों नहीं हो पा रहे?

जवाब : यहां बात माइंडसेट की है। लोगों की सोच में जागरूकता के साथ जिम्मेदारी का भाव भी आना चाहिए। हेलमेट पहनना, रेड लाइट को नियम से क्रास करना, रफ ड्राइविंग न करना आदि चीजें सोच पर भी निभर करती हैं। लोगों को अधिकार के साथ कर्तव्यों की जानकारी भी रहे।

सवाल : सड़क सुरक्षा समिति का अहम हिस्सा होने के कारण पुलिस की भूमिका क्या है?

जवाब : ब्लैक स्पाट व डेंजर जोन चिह्नित करने में अहम भूमिका है। क्योंकि हादसे के बाद प्राथमिक जांच पुलिस ही करती है। जिले में 15 ब्लैक स्पाट, 20 बाटल नेक और 90 दुर्घटना आशंकित स्थल ढूंढे थे। आगे की कार्यवाही संबंधित सड़क एजेंसी को करनी होती है।

सवाल : सड़क सुरक्षा को लेकर क्या पुलिस के पास अलग से बजट होता है?

जवाब : यातायात सेल के पास बजट की व्यवस्था होती है, लेकिन उससे सड़क सुधारने या कोई बड़ा काम नहीं हो सकता है। इन पैसों का इस्तेमाल चेकिंग से जुड़े संसाधन लेने जैसे कैमरे, एल्कोहल मीटर आदि पर होता है। अन्य विभागों की तरह पुलिस के पास ज्यादा बजट नहीं है।

सवाल : अतिक्रमण लोगों की परेशानी व हादसों की वजह है। इससे मुक्ति कैसे मिलेगी?

जवाब : अतिक्रमण हटाने में पुलिस अपना पूरा सहयोग देता है। बशर्ते नगर निगम, लोनिवि या जिस किसी विभाग की संपत्ति हो। कार्रवाई की शुरूआत उसे करनी होगी। अभियान के दौरान सुरक्षा और शांति व्यवस्था बरकरार रखने के लिए फोर्स हमेशा तैयार हैं।

सवाल : हादसे के बाद मदद करने वाले लोगों का रिकार्ड जुटाने के लिए पुलिस क्या करेगी?

जवाब : सड़क हादसे में घायल व्यक्ति की मदद कर जान बचाने वाले लोगों के लिए केंद्र सरकार ने अच्छी योजना शुरू की है। मेरी अपील है कि अगर संकट के वक्त किसी के मददगार बनते हैं तो पुलिस को जरूर सूचित करे। ताकि नाम की आगे संस्तुति की जा सके। इसके लिए नजदीकी थाने-चौकी जाने की जरूरत नहीं है। जिला कंट्रोल रूम- 9411112979, डायल 112 और 9456591940 नंबर पर संपर्क करें। सत्यापन के बाद असल मददगार का नाम आगे भेजा जाएगा।

सवाल : सड़क हादसे के बाद मुआवजा संबंधी प्रकरणों के निस्तारण में तेजी लाने में पुलिस की भूमिका?

जवाब : गंभीर घायल व मौत संबंधी मामले मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में सुने जाते हैं। कई बार पीड़ित पक्ष को मुआवजा मिलने में ज्यादा समय लग जाता है। जिससे परेशानी भी बढ़ जाती है। लिहाजा, पुलिसकर्मियों को विशेष निर्देश दिए हैं कि इस तरह के प्रकरणों में और संवेदनशील होकर काम करें। इसके अलावा किसी भी हादसे के बाद 24 घंटे में रिपोर्ट आइरेड (इंट्रीगे्रटेड रोड एक्सीडेंट डाटाबेस) में दर्ज को कहा है।

सवाल : आम लोगों को यातायात जागरूकता अभियान से पुलिस कैसे जोड़ेगी?

जवाब : स्कूल व अन्य शिक्षण संस्थान में कार्याशाला आयोजित की जाती है। मुख्यालय के निर्देश पर ट्रैफिक वालंटियर योजना भी है। यातायात नियमों की समझ विकसित करने के बाद स्वेच्छा से इनसे सहयोग भी लिया जाता है। अगर कोई भी व्यक्ति समाज के प्रति जिम्मेदारी समझ अपनी भूमिका निभाना चाहे तो वह संपर्क कर सकता है।

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सवाल : कुमाऊं के प्रवेशद्वार में जाम की समस्या क्यों और क्या प्लानिंग हो सकती है?

जवाब : संकरी सड़कें, अतिक्रमण, स्कूल व बैंक्वेट हाल का मुख्य मार्ग से सटा होना, अक्सर सड़क पर जुलूस निकलना व अन्य आयोजन, वीवीआइपी मूवमेंट और व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र होना अहम वजह है। समस्या निजात को लेकर दीर्घकालिक योजना की जरूरत है। मल्टीपल पार्किंग, बाहरी-बाहर निकलने वाली सड़क (ङ्क्षरग रोडनुमा) यानी इंफ्रास्टक्चर पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।

सवाल : पर्यटन सीजन के दौरान चुनौती बढ़ जाती है। इसे लेकर कोई प्लानिंग?

जवाब : इस दौरान वाहनों की संख्या बढ़ जाती है। पुलिस पूरी क्षमता के साथ जुटती है। नैनीताल के आसपास चेक पोस्ट बनाए गए हैं। इस बार रूसी बाइपास पर शटल सेवा के तौर पर उन माडल के वाहनों की डिमांड परिवहन विभाग और प्रशासन से की जाए। जिनमें पर्यटकों को सुविधा और सहूलियत दोनों मिले।

Edited By: Rajesh Verma

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