जागरण संवाददाता, नैनीताल : निकाय चुनाव को लेकर डबल बेंच के फैसले से राहत महसूस कर रही प्रदेश सरकार को निकायों के परिसीमन मामले में हाई कोर्ट से जोर का झटका लगा है। कोर्ट ने 41 निकायों में से 39 के आरक्षण को लेकर जारी अधिसूचना को रद कर दिया है। साथ ही नए सिरे से आरक्षण निर्धारण करने के आदेश पारित किए हैं। एकलपीठ के इस फैसले को सरकार फिर से खंडपीठ में विशेष अपील दायर कर चुनौती देने की तैयारी में है। कोर्ट के फैसले से अगले माह निकाय चुनाव प्रक्रिया पूरी होने पर संशय पैदा हो गया है।

सरकार की ओर से 28 अप्रैल को 41 नगरपालिकाओं में से 39 में आरक्षण की स्थिति साफ कर दी थी, जबकि बाजपुर व श्रीनगर गढ़वाल को इस परिधि से बाहर कर दिया था। किच्छा निवासी मुस्ताक अहमद ने सरकार की इस कमी का आधार बनाते हुए याचिका दायर की। याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार द्वारा जानबूझकर दो निकायों बाजपुर व श्रीनगर गढ़वाल को आरक्षण की परिधि से बाहर रखा गया, जो कि गलत है। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बाजपुर में सीमा विस्तार मामले में स्टे था, जो हटने के बाद फिर से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद सरकार की 28 अप्रैल की अधिसूचना को निरस्त कर दिया है। साथ ही सरकार को श्रीनगर व बाजपुर को भी शामिल कर नए सिरे से निकायों का आरक्षण तय करने का आदेश पारित किया है।

यहां उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों कोर्ट ने परिसीमन व सीमा विस्तार संबंधी अधिसूचना को रद कर दिया था तो सरकार द्वारा एकलपीठ के आदेश के खिलाफ विशेष अपील दायर की। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया था। इधर, विभागीय सूत्रों के अनुसार बाजपुर में वार्डो के परिसीमन व आरक्षण निर्धारण में कम से कम दो माह जबकि श्रीनगर गढ़वाल में एक माह का समय लगना है।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस