यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 28, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
धर्म व शास्त्र सम्मत था ग्रहण काल में जागेश्वर धाम के कपाट बंद करना : स्वामी यतींद्रानंद गिरि महाराज
ज्योतिर्लिंगों में शुमार जागेश्वर धाम में सूर्यग्रहण पर कपाट बंद करने के मामले में धर्मगुरु व धर्माधिकारी पक्ष में उतर ...और पढ़ें

अल्मोड़ा, जेएनएन : ज्योतिर्लिंगों में शुमार जागेश्वर धाम में सूर्यग्रहण पर कपाट बंद करने के मामले में धर्मगुरु व धर्माधिकारी पक्ष में उतर आए हैं। उन्होंने इसे धर्म व शास्त्र सम्मत करार दिया है। साथ ही कपाट बंद करने पर उठ रहे सवालों पर स्पष्टï किया है कि शास्त्रों में ग्रहणकाल के लिए यही व्यवस्था है। दरअसल, जागेश्वर धाम के इतिहास में पहली बार ग्रहण काल के दौरान परंपरा बदली गई। बीती 26 दिसंबर को सूर्यग्रहण पर ज्योतिर्लिंग व महामृत्युंजय आदि मंदिर समूहों के कपाट बंद रख पूजा अर्चना वर्जित की गई थी। यह निर्णय श्री बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी वेदपाठी पं. भुवन चंद्र उनियाल से विमर्श के बाद लिया गया था। इस पर विवाद होने पर जागेश्वर धाम के प्रधान पुरोहित पं. हेमंत भट्ट ने श्री बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी पं. उनियाल के साथ ही वरिष्ठ महामंडलेश्वर श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा स्वामी यतींद्रानंद गिरि महाराज से राय ली। इस पर उनके इस कदम को धर्म व शास्त्र सम्मत बता इस बात पर विवाद को निरर्थक करार दिया।

शास्त्र में जो है वही मान्य होगा : महामंडलेश्वर
वरिष्ठ महामंडलेश्वर श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा स्वामी यतींद्रानंद गिरि महाराज ने स्पष्टï किया कि सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय सभी प्राण प्रतिष्ठित स्थान मंदिर पूजा के लिए बंद किए जाते हैं। हमारे शास्त्रों की ऐसी व्यवस्था है। भगवान बदरीनाथ, भगवान केदारनाथ, काशी विश्वनाथ ही नहीं महाकाल उज्जैन में भी ग्रहणकाल के समय गर्भगृह में प्रवेश निषेध कर दिया जाता है। पुजारी तक वहां नहीं रहते। ग्रहण के उपरांत शिखर से फर्श तक मंदिर की धुलाई व शुद्धीकरण के बाद ही पूजा अर्चना होती है। कुछ मंदिर ग्रहण के सूतक से मोक्ष तक बंद रहते हैं। कुछ केवल ग्रहण काल में ही बंद रहते हैं। जागेश्वर धाम में ग्रहण काल में मंदिर बंद करने या ना करने का जो विवाद चल रहा अनावश्यक है। अगर किसी कारण से यह अनुचित परंपरा चल रही है तो इसे बंद कर आगे ठीक करना चाहिए। इस विषय पर कोई टकराव अथवा विवाद खड़ा नहीं करना चाहिए।

यह बोले धर्माधिकारी व पुरोहित
वहीं, श्री बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी पं. भुवन चंद्र उनियाल ने कहा कि जो भी हुआ अच्छा हुआ। परंपरा जो छूटी थी सामने आई है। धर्म जो कहता है, उसके अनुसार चलना चाहिए। प्रधान पुरोहित चले हैं धर्म के साथ। कमेटी बोलेगी हम जवाब देंगे। यह भगवान शंकर की इच्छा थी, हो गया। उधर, जागेश्वर धाम के प्रधान पुरोहित पं. हेमंत भट्ट ने कहा कि मैं धर्म के साथ चला। शास्त्रों में जो वर्णित है उसका ही पालन किया। धर्माधिकारी उनियाल जी से राय के बाद ही ग्रहण काल में कपाट बंद किए गए। मैं शंकराचार्य स्वरूपानंद जी से भी इस संबंध में अपना पक्ष रखूंगा।
