नैनीताल, जेएनएन : पूर्व कैबिनेट सचिव अजीत कुमार सेठ ने ग्लोबल वार्मिंग को बड़ा संकट करार देते हुए कहा कि धरती के तापमान को कम करने की दिशा में भारत अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए इलेक्ट्रिक कार तथा सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि मीडियम, स्मॉल, माइक्रो इंटरप्राइजेज को बढ़ावा देना होगा, तभी हिमालयी राज्य तरक्की के नए आयाम स्थापित कर सकेंगे।

उत्तराखंड प्रशासन अकादमी नैनीताल में आइएफएस अफसरों के ट्रेनिंग प्रोग्राम में पहुंचे पूर्व कैबिनेट सचिव ने मुलाकात में कहा कि ग्लोबल वार्मिंग की समस्या डेढ़ सौ साल पुरानी है। जब 1750 में ब्रिटेन में स्टीम इंजन का अविष्कार हुआ, यह समस्या तब से चली आ रही है। उन्होंने माना कि बढ़ती आबादी भी इसका एक कारण है, लेकिन दुनिया के विकसित देश इस समस्या के लिए अधिक जिम्मेदार हैं। 1979 से इस मसले को लेकर वैश्विक स्तर पर कांफ्रेंस हो रही हैं। 12 दिसंबर 2015 को पेरिस समझौते में 177 देशों ने हस्ताक्षर किए। तय हुआ कि तापमान दो डिग्री कम किया जाए, लेकिन पिछले साल कोरिया में हुई विशेषज्ञों की कांफ्रेंस में कहा गया कि दो डिग्री को धरती बर्दास्त नहीं कर पाएगी, इसलिए इसे 1.5 कर दिया जाए। दिसंबर में पोलैंड में हुई कांफ्रेंस पर इसके लिए मैकेनिज्म तैयार करने पर चर्चा हुई। 

कारों की बिक्री नियंत्रित होगी 

पूर्व कैबिनेट सचिव ने कहा कि भारत ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से निपटने के लिए अनेक कदम उठा रहा है। सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन देने के साथ ही बैट्री चालित व इलेक्ट्रिक कार को प्रोत्साहन देना होगा। कारों की बिक्री नियंत्रित करनी होगी। 

हिमालयी राज्यों का हो रहा शोषण

पूर्व कैबिनेट सचिव ने माना कि इस मामले में हिमालयी राज्यों का शोषण हो रहा है। इन राज्यों में लघु व कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना होगा। इस संबंध में 27 अप्रैल को भीमताल में बैठक भी करेंगे। रूरल टेक्नोलॉजी एक्शन ग्रुप बनाया है, उस पर भी चर्चा होगी। 

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Posted By: Skand Shukla

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