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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ ने की घोषणा, 'तीर्थ' पहुंच गई योजना

Published: Sun, 13 Sep 2026 11:11 AM (IST)

उत्तराखंड के रामनगर में तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत द्वारा घोषित लाइट एंड साउंड शो परियोजना पांच साल बाद भी ...और पढ़ें

रामनगर में तराई पश्चिमी वन प्रभाग की कार्यशाला की यह जमीन भी देखी गई थी लाइट एंड साउंड शो के लिए। जागरण

रामनगर में तराई पश्चिमी वन प्रभाग की कार्यशाला की यह जमीन भी देखी गई थी लाइट एंड साउंड शो के लिए। जागरण  

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त्रिलोक रामनगर, रामनगर । देश ही नहीं, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से सालभर हजारों पर्यटक जिस रामनगर की ओर खिंचे चले आते हैं, उसी रामनगर को पर्यटन की एक नई सौगात देने का सपना पांच साल पहले देखा गया था।

सपना था उत्तराखंड का पहला लाइट एंड साउंड शो। ऐसा शो, जो कार्बेट नगरी की कहानी को रोशनी, ध्वनि और दृश्यों के जरिए पर्यटकों के सामने रखता और रामनगर के पर्यटन को एक नया आयाम देता। घोषणा हुई, जमीन चुनी गई, बजट पास हुआ और सरकारी स्तर पर कागजों में योजना ने आकार भी ले लिया, मगर सरकारी व्यवस्था की भूलभुलैया में यह योजना ऐसी उलझी कि पांच साल बाद भी जमीन पर एक ईंट तक नहीं रखी जा सकी।

अब सरकार ने इस योजना से ही हाथ पीछे खींच लिए हैं। यानी जिस लाइट एंड साउंड शो को रामनगर की पहचान में एक और अध्याय जोड़ना था, वह अब सरकारी फाइलों में ही दफन हो गया है। सवाल सिर्फ एक योजना के बंद होने का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है, जिसमें घोषणाएं पल भर में हो जाती हैं, बजट की स्वीकृतियां मिल जाती हैं, जमीन तक तलाश ली जाती है, लेकिन योजना को धरातल तक पहुंचाने में वर्षों बीत जाते हैं।

21 मार्च 2021 को जगा था सपना

21 मार्च 2021 को तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कार्बेट नगरी रामनगर में लाइट एंड साउंड शो बनाने की घोषणा की थी। योजना के लिए करीब चार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया था।

इसे कार्बेट टाइगर रिजर्व के निर्देशन में तैयार किया जाना था। घोषणा के बाद सरकारी मशीनरी सक्रिय हुई। कार्बेट के अधिकारियों ने रामनगर वन प्रभाग के आमडंडा क्षेत्र में करीब दो हेक्टेयर जमीन भी तलाश ली।

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निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये कार्बेट फाउंडेशन मद से लेने की शासन स्तर से स्वीकृति भी मिल गई। यहां तक सब कुछ ठीक चलता दिखाई दिया। लगा कि अब रामनगर में जल्द ही पर्यटकों के लिए रोशनी और ध्वनि के इस नए संसार का निर्माण शुरू हो जाएगा, लेकिन कहानी यहीं से बदल गई।

जमीन अपनी नहीं थी, योजना पर उठे सवाल

कार्बेट टाइगर रिजर्व के निर्देशन में प्रस्तावित योजना के लिए जमीन रामनगर वन प्रभाग की थी। सवाल उठने लगे कि आखिर कार्बेट की योजना रामनगर वन प्रभाग की जमीन पर कैसे बनेगी? सरकारी तंत्र ने इसका रास्ता निकालने के लिए फिर दिशा बदली।

सहमति बनी कि कार्बेट टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि रामनगर वन प्रभाग अपने क्षेत्र की जमीन पर खुद लाइट एंड साउंड शो बनाएगा। एक साल इसी कवायद में निकल गया। योजना वही थी, सपना वही था, जमीन भी सामने थी, लेकिन जिम्मेदारी का ठिकाना बदल चुका था।

एक प्रभाग से दूसरे प्रभाग तक पहुंचती रही फाइल

इसके बाद रामनगर वन प्रभाग ने योजना को तराई पश्चिमी वन प्रभाग के पाले में डाल दिया। अब जिम्मेदारी तराई पश्चिमी वन प्रभाग की थी, लेकिन यहां पहुंचकर योजना की रफ्तार और धीमी पड़ गई। अधिकारियों को जमीन तक नहीं मिली।

काफी समय बीतने के बाद भी जब उपयुक्त स्थान नहीं तलाशा जा सका तो अधिकारियों ने अपनी कार्यशाला की जमीन पर लाइट एंड साउंड शो बनाने की बात कही। यानी जिस योजना के लिए कभी दो हेक्टेयर जमीन चिह्नित हो चुकी थी, जिसके लिए बजट की स्वीकृति मिल चुकी थी और जिसे प्रदेश के पहले लाइट एंड साउंड शो के तौर पर देखा जा रहा था, वह पांच साल में जमीन से ज्यादा विभागों के बीच घूमती रही। अब आखिरकार सरकार ने इस योजना को बनाने से ही इन्कार कर दिया है।

लाइट एंड साउंड शो पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत की घोषणा थी, लेकिन योजना धरातल पर नहीं उतरी। कार्बेट के साइलेंस जोन को वजह बताते हुए लाइट एंड साउंड शो को बनाने से मना कर दिया है। अब इसे नहीं बनाया जाएगा। - दीवान सिंह बिष्ट, विधायक रामनगर