संसू चोरगलिया: गौलापार के बागजाला में प्रशासन द्वारा बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर के बाहर डॉक्टरों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले मास्क, ग्लब्ज, चश्मे व अन्य सामान नष्ट करने के बजाए कूड़े में फैंक दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग इस लापरवाही पर ग्रामीणों तथा जनप्रतिनिधियों ने गहरी नाराजगी जताई है।

गौलापार के बागजाला में प्रशासन द्वारा जामतियों को क्वारंटाइन करने के लिए बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर के बाहर बुधवार को डॉक्टरो द्वारा कोरोना संक्रमित लोगों जांच में प्रयोग किए गए मास्क, ग्लब्ज, चश्मे व अन्य मेडिकल उपकरण मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में यह सूचना पूरे गाव में फैल गई। इस पर ग्रामीणों तथा जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर तो यह सूचना सही मिली। जिस पर ग्रामीणों ने गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इस पर क्वारंटाइन सेंटर में तैनात कर्मियों से पूछताछ की तो कोई जानकारी नहीं मिली। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग कि यह बड़ी लापरवाही है। यदि कोई व्यक्ति इन उपकरणों को छू लेता तो उस व्यक्ति के भी कोरोना संक्त्रमित होने की पूरी आशका होगी। ग्रामीणों का कहना है कि क्वारंटाइन सेंटर पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नही हैं। यदि वहां भर्ती कोई व्यक्ति सेंटर से भाग कर पास के गाव में पहुच जाता है तो वह अपने साथ अन्य ग्रामीणों को भी संक्रमित कर सकता है। ग्रामीणों ने क्वारंटाइन सेंटर के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की माग प्रशासन से की है। जनप्रतिनिधियों में ग्राम प्रधान देवला तल्ला प्रदीप नौला, निखिल सुनाल, प्रकाश बिष्ट, धनु रैक्वाल, नीरज रैक्वाल आदि थे।

इस बारे में पूछे जाने पर एसडीएम विवेक राय ने कहा कि बागजाला क्वारंटाइन सेंटर में कोई संक्रमित व्यक्ति नहीं है। क्वारंटाइन सेंटर में मेडिकल उपकरणों को फैकने के लिए बडे़ डस्टबिन बने हैं। किट को जलाने का प्रावधान

पीपीई किट को जलाए जाने की व्यवस्था है। इस तरह के बायोमेडिकल वेस्ट को निस्तारित करने के लिए गदरपुर के ग्लोबल कंपनी के अलावा एसटीएच में भी इसे जलाए जाने का प्रावधान है।

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यह गंभीर मामला है। पीपीई किट को ऐसे नहीं फेंका जाना चाहिए। इस मामले को गंभीरता से देखा जाएगा।

सविन बंसल, डीएम

Posted By: Jagran

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