हल्द्वान, जेएनएन : नैनीताल के समीप वीरभट्टी स्थित पार्वती प्रेमा जगाती स्कूल में आयोजित वार्षिकोत्सव में पहुंची राज्यपाल बेबी रानी मौर्य की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात काठगोदाम थानाध्यक्ष का वाहन लौटते समय 30 फीट गहरी खाई में गिर गया। हादसे में थानाध्यक्ष व महिला दारोगा गंभीर रूप से जख्मी हो गए। जबकि थानाध्यक्ष के चालक व हमराह की मृत्यु हो गई। हादसे से पुलिस महकमा शोक में है।

वार्षिकोत्सव में राज्यपाल बतौर मुख्य अतिथि पहुंची थीं। उनकी सुरक्षा व्यवस्था में तल्लीताल और मल्लीताल थाने के पुलिस बल के अलावा काठगोदाम व बनभूलपुरा थानाध्यक्ष की फोर्स समेत ड्यूटी भी लगाई गई थी। राज्यपाल के हेलीकॉप्टर के कैलाखान (नैनीताल) हेलीपैड पर उतरने के बाद मौसम को देखते हुए वापसी में हल्द्वानी से उड़ान भरने के लिए कार्यक्रम परिवर्तित कर दिया गया। राज्यपाल के वापसी का कार्यक्रम बदलने पर अपराह्न करीब साढ़े 12 बजे काठगोदाम थानाध्यक्ष नंदन सिंह रावत यातायात व्यवस्था बनाने के लिए कार्यक्रम स्थल से लौट गए। स्कूल से कुछ ही दूरी पर उनका वाहन अनियंत्रित होकर 30 फीट खाई में पलटते हुए नीचे की सड़क पर पहुंच गया। हादसे में थानाध्यक्ष नंदन रावत समेत महिला दारोगा माया बिष्ट, चालक नंदन बिष्ट, हमराह ललित मोहन गंभीर रूप से जख्मी हो गए। सभी घायलों को तुरंत हल्द्वानी लाया गया।

थानाध्यक्ष व कांस्टेबल ललित मोहन को बृजलाल हॉस्पिटल और महिला दारोगा माया बिष्ट व चालक नंदन बिष्ट को कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ देर बाद ही चिकित्सकों ने कांस्टेबल ललित निवासी लीमाछौड़ा, छडऩदेव, डीडीहाट (पिथौरागढ़) व चालक नंदन बिष्ट निवासी मेजर मनोज विहार कॉलोनी, खत्याड़ी (अल्मोड़ा) को मृत घोषित कर दिया। घायल थानाध्यक्ष व महिला दारोगा का उपचार चल रहा है। थानाध्यक्ष की हालत स्थिर है जबकि महिला दरोगा की हालत चिंताजनक बनी है। 

कमिश्नर, डीआइजी व एसएसपी ने जाना घायलों का हाल

कमिश्नर राजीव रौतेला, डीआइजी जगत राम जोशी, एसएसपी सुनील कुमार मीणा, एसपी क्राइम रचिता जुयाल समेत जिले भर के अफसर, थानाध्यक्ष व पुलिसकर्मियों ने बृजलाल व कृष्णा अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और मृतकों के परिजनों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को बेहतर उपचार के लिए निर्देश दिए।

हादसे का पता चलते ही पुलिस परिवार में छाया मातम

किसी भी हादसे के बाद घायलों की जान बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले मंगलवार को बेबस और मायूस थे। दिन न रात देखकर दूसरों की रक्षा के लिए निकल पडऩे वाले दो जांबाज सिपाही अपने साथियों से बिछुड़ चुके थे। उन्हें खोने के गम से पुलिस परिवार में मातम छा गया था। कई जवानों की आंखें छलक रही थीं। हर कोई उस मनहूस घड़ी को कोस रहा था, जिस समय पुलिस वाहन अनियंत्रित होकर खाई में पलट गया। राज्यपाल की सुरक्षा दस्ते में लगे काठगोदाम थानाध्यक्ष के वाहन के दोपहर साढ़े 12 बजे वीरभट्टी से लौटते समय खाई में गिरने की सूचना मिलते ही जिले भर के पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। जिलेभर के अफसरों ने हल्द्वानी के अस्पतालों की ओर कूच कर दिया। कृष्णा अस्पताल व बृजलाल अस्पताल में अफसरों के अलावा जिले भर से थानाध्यक्ष, पुलिसकर्मियों का जमावड़ा लग गया। पहले कृष्णा अस्पताल में 37 वर्षीय नंदन बिष्ट और फिर 37 वर्षीय ललित मोहन के दम तोडऩे से खाकी के पीछे छिपे इंसान का दर्द छलक उठा। अस्पताल से लेकर काठगोदाम थाने में जवान दहाड़े मारकर रो रहे थे। हर ओर मातमी माहौल बना था।

थानाध्यक्ष के हाथ में फ्रेक्चर, महिला दारोगा के सिर व पसली में गंभीर चोटें

बृजलाल हॉस्पिटल में भर्ती थानाध्यक्ष नंदन सिंह रावत का हाथ फ्रेक्चर हुआ है। उनके सिर में भी चोटें हैं। वहीं महिला दारोगा माया बिष्ट के सिर व पसलियों में गंभीर चोटें हैं। उन्हें आइसीयू में वेंटीलेटर पर रखा गया है। 

ब्रेक फेल होने से हुआ हादसा

बृजलाल अस्पताल में भर्ती थानाध्यक्ष नंदन रावत ने बताया कि स्कूल से मुख्य मार्ग को लौटते समय अचानक ब्रेक फेल हो गए। जब तक वह जान बचाने के प्रयास करते वाहन खाई में पलट गया। थानाध्यक्ष ने बताया कि सीट बेल्ट पहने होने से उनकी जान बच पाई। 

ललित का शव पिथौरागढ़ भेजा, नंदन का आ ले जाएंगे

मोर्चरी में दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद अफसरों ने परिसर में शोक सलामी दी। दोनों के परिजन भी मोर्चरी में पहुंच गए थे। देर शाम गनर ललित मोहन का शव परिजन पिथौरागढ़ स्थित घर के लिए लेकर रवाना हो गए। उनके साथ पुलिस की गारद भी भेजी गई है। वहीं चालक नंदन बिष्ट का शव बुधवार सुबह अल्मोड़ा जनपद स्थित घर भेजा जाएगा।

बीमार पत्नी के साथ पूरे परिवार का जिम्मा उठाता था ललित

ललित मोहन जितना काम के प्रति संजीदा था, उतना ही परिवार के लिए भी समर्पित रहता था। पत्नी के बीमारी की वजह से घर से अधिकांश काम भी वह खुद ड्यूटी पर आने से पहले और लौटने के बाद करता था। ललित परिवार के साथ काठगोदाम थाने के स्टाफ क्वार्टर में रहता था। उनका एक बेटा सार्थक और बेटी सोनल है। सार्थक कक्षा पांच और सोनल कक्षा चार में पढ़ती है।

पत्नी की बीमारी की वजह से रुकवाया था ट्रांसफर

थानाध्यक्ष काठगोदाम के हमराह ललित मोहन का करीब तीन माह पहले अल्मोड़ा जनपद के लिए ट्रांसफर हो गया था। ललित ने अफसरों को पत्नी की बीमारी के बारे में बताकर छह माह के लिए ट्रांसफर रुकवाया लिया था।

घंटों तक परिवार को सूचना देने की हिम्मत नहीं जुटा पाए

चालक नंदन बिष्ट व कांस्टेबल ललित मोहन को अस्पताल पहुंचने के कुछ ही देर बाद चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था। पुलिस के अफसर व जवान घंटों तक मृतकों की पत्नियों व बच्चों को मनहूस खबर बताने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे। दोनों के भाइयों से संपर्क कर बुलाया गया। दोपहर बाद जैसे ही ये खबर पत्नी व बच्चों को मिली, दोनों परिवारों में कोहराम मच गया।

गृहप्रवेश के डेढ़ माह बाद ही नहीं रहा मुखिया

चालक नंदन बिष्ट कुछ समय पहले तक हल्द्वानी कोतवाली में तैनात था। डेढ़ माह पहले उसका तबादला काठगोदाम थाने के लिए हुआ था। बताते हैं कि नंदन बिष्ट ने 10 लाख रुपये बैंक से ऋण लेकर रामपुर रोड स्थित हल्दूपोखरा दरम्वाल में मकान बनवाया था। एक माह पहले ही उसने गृहप्रवेश किया था। मंगलवार को हुए हादसे में काल ने बिष्ट परिवार का मुखिया ही छीन लिया। नंदन बिष्ट की पत्नी मंजू बिष्ट रो-रो कर बार-बार बदहवास हो जा रही हैं। परिवार मेंतीन छोटे बच्चे आकांक्षा (14), निशा (12) व मुकुल (11) हैं। देर रात तक घर में पुलिस जवानों का जमावड़ा लगा हुआ था।

मृतक दोनों जवानों के भाई भी पुलिस में कर रहे सेवा

ललित मोहन व नंदन बिष्ट के भाई भी पुलिस महकमे में सेवा दे रहे हैं। कोतवाल विक्रम राठौर ने बताया कि नंदन का भाई गोपाल सिंह भीमताल थाने में तैनात है, जबकि ललित का एक भाई प्रकाश रुद्रपुर व दूसरा कुंदन जैंती अल्मोड़ा में तैनात है।

फोन पर बताई जा रही थी डयूटी और वाहन खाई में गिर गया

काठगोदाम थाने में तैनात जवान खड़क सिंह गुसाई ने बताया कि राज्यपाल के हल्द्वानी आने के संभावित कार्यक्रम की जानकारी मिलने पर तुरंत यातायात व्यवस्था के लिए जवानों की ड्यूटी लगाई जा रही थी। वह करीब साढ़े 12 बजे कांस्टेबल ललित को फोन कर ड्यूटी स्थल की जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान अचानक एक गूंज सुनाई दी और फिर दूसरी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। संभवत: उसी समय हादसा हुआ था।

2001 में ललित और 2006 में भर्ती हुआ था नंदन

पुलिस रिकार्ड के मुताबिक, ललित मोहन 11 अक्टूबर 2001 को पुलिस महकमे में भर्ती हुआ था, जबकि नंदन बिष्ट 10 अप्रैल 2006 को कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुआ था।

Posted By: Skand Shukla

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