जागरण संवाददाता, बागेश्वर: बारिश के कारण पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हो गई हैं। आरे के समीप जखेड़ा पेयजल लाइन के पाइप नदी में बह गए हैं। पंपिंग योजनाओं ने भी काम करना बंद कर दिया है। जिसे कारण शहर से लेकर गांव तक पानी को हाहाकार मच गया है। लोग प्राकृतिक स्रोतों का रुख कर रहे हैं। जहां स्रोत नहीं है, वह बारिश का पानी एकत्र करने में जुटे हुए हैं।

मानसून के दौरान प्रतिवर्ष जिले में पेयजल संकट पैदा होता है। बाजवूद ठोस जल नीति नहीं बन सकी है। सरयू नदी पर बनी पंपिंग योजनाएं बारिश होते ही शोपीस बन गई हैं। जखेड़ा पेयजल योजना लगभग पांच मीटर बह गई है। जिसके अभी बनने के आसार नहीं हैं। जिससे कठायतबाड़ा समेत नगर क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी है। 

लोग बारिश का पानी एकत्र कर, जरूरी काम निपटा रहे हैं। प्रदूषित पानी पीने से बीमार होने का भी भय बना हुआ है। खरेही क्षेत्र में दस दिन बाद भी पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी है। स्थानीय उपभोक्ता गीता जोशी, चंपा देवी, तारा देवी, कमला देवी, सरोज, पुष्पा देवी आदि ने कहा कि जलसंस्थान की योजनाएं धन कमाने के लिए बनी हुई हैं। पानी नहीं देने के बाद भी बिल आएंगे। उन्होंने कहा कि वह उपभोक्ता फोरम की शरण में जाएंगे।

दुग नाकुरी के तीस गांवों में बिजली संकट

दुग नाकुरी के तीस गांवों के अलावा कपकोट के उच्च हिमालयी गांवों में बिजली आपूर्ति ठप है। शहर में भी बिजली की आंख मिचौली चल रही है। जिससे उपभोक्ता परेशान हो गए हैं। लघु, मझौले उद्योगों पर भी विपरीत असर पड़ने लगा है।

संचार सेवा भी पटरी से उतरी

कपकोट क्षेत्र की संचार सेवा पटरी से उतर गई है। जिला मुख्यालय में भी बीएसएनएल के सिग्नल आते और जाते रहे। ब्रांड बैंड सेवा पर भी असर पड़ने लगा है। इंटरनेट सेवा सुचारु नहीं होने से लोगों के जरूरी काम भी प्रभावित हो गए हैं।

जिला आपदा अधिकारी शिखा सुयाल ने बताया कि बंद सड़कों को खोलने का काम युद्ध स्तर से चल रहा है। जिलाधिकारी ने बिजली, पानी, सड़क, संचार सेवा को तत्काल सुचारू करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।

Edited By: Prashant Mishra