जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : मकर संक्रांति पर स्नान, दान आदि करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी मंशा के साथ शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट पर गार्गी नदी में स्नान किया। आस्था की डुबकी लगाने के बाद परिवार की सुख-समृद्धि व अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। कई परिवारों ने घाट पर बच्चों के मुंडन व किशोरों का उपनयन संस्कार भी कराया।

कुमाऊं व गढ़वाल मंडल के विभिन्न स्थानों से पहुंचे कत्यूरी वंशजों ने गुरुवार रात अपनी राजमाता जिया रानी का जागर लगाने के बाद शुक्रवार सुबह गार्गी में डुबकी लगाई। ठंड के मौसम में सुबह 6 बजे से स्नान शुरू हो गया। इसके बाद परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए सभी लोग अपने घरों को लौट गए। कोरोना के कारण इस बार रानीबाग में उत्तरायणी मेला नहीं लगा। हालांकि कुछ दुकानें जरूर दिखीं। सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो गई है। विवाह समारोह के लिए शहर के कई बैंक्वेट हाल सजने लगे हैं। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो विवाह के बड़े मुहूर्त 22 जनवरी के बाद हैं। 

घुघुते बनाकर कौओं को बुलाया

मकर संक्रांति को घुघुतिया लोक पर्व मनाया जाता है। सरयू पार कहे जाने वाले बागेश्वर व पिथौरागढ़ मूल के परिवारों ने गुुरुवार शाम घुघुते बनाए व शुक्रवार सुबह कौओं को खिलाया। बच्चों ने छत से काले कौवा काले, घुघुति माला खा ले, तू खा पूरी, मैंके दीजा सुनु छुरी, ले कौवा बड़, मैंके दीजा सुनु घड़... कहते हुए कौवे को बुलाया। वहीं, नैनीताल के अलावा अल्मोड़ा, चम्पावत से हल्द्वानी आकर रहने लगे परिवारों ने शुक्रवार शाम घुघुते बनाए। शनिवार सुबह कौआ काले काले, घुघुती माला खाले के स्वरों में बच्चे कौओं को बुलाएंगे। बाद में घुघुते स्वजनों व रिश्तेदारों को भेजे जाते हैं।

Edited By: Prashant Mishra