जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : नजूल की जमीन को फ्री-होल्ड कराने के लिए हल्द्वानी के हजारों लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। सितंबर अंत में कैबिनेट के फैसले से बड़ी उम्मीद जगी थी। लेकिन राजभवन से कुछ आपत्तियों का हवाला अध्यादेश को वापस कर दिया गया है। जिस वजह से हल्द्वानी नगर निगम में रहने वाले करीब 20 हजार लोगों को उम्मीदों पर फिलहाल ग्रहण लग गया। रामनगर के बीस वार्डों के लोगों पर भी इसका असर पड़ेगा। यहां 70 फीसदी शहरी आबादी नजूल लैंड पर बसी है।

सितंबर अंत में पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट ने नजूल जमीन पर बसे लोगों को मालिकाना हक देने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई थी। इससे पहले स्पष्ट आदेश नहीं होने के कारण मामला अटक जाता था। हल्द्वानी में नैनीताल रोड से सटे व अन्य कई इलाके नजूल लैंड में आते हैं। आवासीय और व्यावसायिक दोनों तरह के निर्माण इन जमीनों पर हुए हैं। लेकिन मालिकाना हक नहीं होने के कारण स्वामित्व नहीं मिल पा रहा था। बैंक से लोन तक मिलने की कोई संभावना नहीं थी। 

चुनावी साल को ध्यान में रखते हुए दो माह पूर्व सरकार ने नजूल को लेकर अध्यादेश लाने का फैसला लिया था। निचले स्तर पर कवायद शुरू भी हो गई थी। लेकिन इससे जुड़ा एक मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित था। जिस वजह से राजभवन ने अध्यादेश को लौटा दिया। शासन स्तर पर मामले को सुलझाने को प्रयास तो किए जा रहे हैं। मगर हाल-फिलहाल में नजूल पर बसे लोगों को हक मिलना अब संभव नहीं लग रहा। इसके अलावा पुरानों वादों का निपटारा भी नहीं हो पाएगा।

हल्द्वानी का नजूल लैंड

श्रमिक बस्ती शीशमहल, सुभाषनगर, भोटिया पड़ाव पूर्वी, कोहली गार्डन, इंद्रजीत गार्डन, राजेंद्र नगर, टनकपुर रोड, लाइन नंबर एक से 17, पश्चिमी व पूर्वी इंदिरानगर, भोलानाथ गार्डन, भवानीगंज, पटेल चौक, साहूकारा लाइन, मंगल पड़ाव, नया बाजार, कारखाना बाजार, कुल्यालपुरा, दुर्गा कालोनी, नई बस्ती, काठगोदाम के अलावा काठगोदाम क्षेत्र का बड़ा हिस्सा भी नजूल लैंड है। सहायक नगर आयुक्त विजेंद्र चौहान ने बताया कि नजूल जमीन का लंबे समय से सर्वे नहीं हुआ। अनुमान है कि हल्द्वानी में बीस हजार से अधिक परिवार नजूल जमीन पर बसे होंगे।

Edited By: Skand Shukla