हल्द्वानी, जेएनएन : कंटेमेंट जोन घोषित किए गए शहर के एक प्राइवेट अस्पतालों में बुधवार को मरीजों और उनके परिजनों ने जमकर हंगामा काटा। आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। खाना-पानी तो दूर भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज तक नहीं किया जा रहा है। काफी देर तक अस्पताल के प्रवेश द्वार पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने के बाद इनमें से कई लोग धरने पर बैठ गए।

गौरतलब है कि जज फार्म को निकलने वाली रोड पर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में दो दिन पहले एक मरीज की कोरोना संक्रमण के चलते मौत हो गयी थी। जिसके बाद अस्पताल के एमडी समेत 18 कर्मचारियों को क्वारंटाइन कर दिया गया था। अस्पताल में भर्ती करीब 46 मरीजों का इलाज अस्पताल के भीतर के अन्य स्टाफ को करने की अनुमति दी गई थी। इधर, बुधवार को मरीजों को देखने अस्पताल पहुंचे तीमारदारों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। प्रवेश द्वार पर एकत्र होकर नारेबाजी की गई।

 

कहा कि मरीजों को पिछले दो दिन से इलाज नहीं मिल रहा है। मरीजों को डिस्चार्ज भी नहीं किया जा रहा है। खाना भी 400 रुपये महंगे दाम पर मिल रहा है। बिना पीपीई किट और ग्लब्ज के स्टाफ काम कर रहा है। आरोप लगाया कि अस्पताल के एक डॉक्टर क्वारंटाइन होने के बावजूद मरीजों को देखने अस्पताल आ रहे हैं। इस दौरान पुलिस और मरीज तीमारदारों में जमकर नोंकझोंक भी हुई और लोगों ने हंगामा किया।

 

इस मामले को लेकर अस्पताल के एमडी डॉ. गौरव सिंघल का कहना है कि मैं क्वारंटाइन हूं, मामले की जानकारी नहीं है। जो मरीज जिस दिन डिस्चार्ज हो रहे हैं उनसे उस दिन से कोई फीस नहीं ली जा रही है। हमसे मरीजों की अच्छी सेहत के लिए जितना हो सकेगा उतना कर रहे हैं।

 

प्रशासन के कायदे बन रहे परेशानी

कंटेनमेंट जोन बनाए जाने के बाद प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के द्वारा अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए कुछ कायदे -कानून बनाए गए। अस्पताल में भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज न किए जाने के निर्देश भी जारी हुए। ऐसे में जिन मरीजों को इस बीच में डिस्चार्ज हो जाना था वे भी अस्पताल में ही फंसे हुए हैं।

 

युवा कांग्रेस ने भी दिया धरना

मामले की जानकारी मिलते ही युवा कांग्रेस कार्यकर्ता भी अस्पताल पहुंच गए। जहां उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ धरना दिया। संयोजक उमेश बिनवाल और जिला मंत्री हेमंत साहू ने कहा कि अव्यवस्थाएं चरम पर हैं। तीमारदारों को तक धरना देना पड़ रहा है। ये सरकार और जिला प्रशासन की नाकामी है। कहा कि यदि जल्द व्यवस्थाएं नहीं सुधरी तो आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। यहां एनएसयूआई जिलाध्यक्ष विशाल भोजक, रोहित आर्या भी मौजूद रहे।

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