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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 01, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हरिद्वार को छोड़कर उत्तराखंड में 30 नवम्बर तक होंगे पंचायत चुनाव UTTARAKHAND HIGH COURT

By Skand ShuklaEdited By:
Published: Thu, 01 Aug 2019 12:21 PM (GMT+05:30)Updated: Sat, 03 Aug 2019 12:51 PM (GMT+05:30)

हाईकोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश रमेश रंगनाथन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने उत्तराखंड के हरिद्वार को छोड़ 12 जिलों में 30 ...और पढ़ें

हरिद्वार को छोड़कर उत्तराखंड में 30 नवम्बर तक होंगे पंचायत चुनाव UTTARAKHAND HIGH COURT
हरिद्वार को छोड़कर उत्तराखंड में 30 नवम्बर तक होंगे पंचायत चुनाव UTTARAKHAND HIGH COURT

नैनीताल, जेएनएन : हाईकोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश रमेश रंगनाथन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने उत्तराखंड के हरिद्वार को छोड़ 12 जिलों में 30 नवम्बर तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने के आदेश पारित किए हैं। हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल होने हैं । उसके बारे में कोर्ट ने कहा है कि ऐसी स्थित वहां नहीं आनी चाहिए, अगर आती है तो चुनाव आयोग कोर्ट की शरण में आ सकता है । प्रशासकों की नियुक्ति पर कोर्ट ने कहा है कि वे अपने कार्य करते रहेंगे, तब तक कोई प्रशासनिक या नीतिगत निर्णय नहीं लेंगे और उनकी वित्तीय शक्तियां सीज रहेंगी।
पिछले दिनों उत्तराखंड में पंचायत चुनाव में देरी पर दाखिल राष्ट्रपति शासन लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा पंचायतों में नियुक्त किए गए प्रशासकों के नीतिगत फैसले लेने पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि प्रशासक पंचायतों में काम तो करेंगे मगर कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं ले सकते हैं।सुनवाई के दौरान कोर्ट में सरकार ने कहा था कि चार महीनों के भीतर राज्य में पंचायत चुनाव करवा दिया जाएगा, लेकिन कोर्ट इस तर्क से संतुष्ट नहीं था। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को फटकार लगाते हुए कहा था कि संवैधानिक संकट की स्थिति में राज्य निर्वाचन आयोग ने कोर्ट में याचिका दाखिल क्यों नहीं की। 

संशोधित नियमावली के तहत होंगे इस बार चुनाव 
इस बार पंचायत चुनाव हाल में संशोधित राज्य के नए पंचायती राज एक्ट के हिसाब से होंगे। अलबत्ता, निर्वाचन के लिए उत्तर प्रदेश की पंचायती राज नियमावली से ही काम चलाया जाएगा। वजह ये कि राज्य का पंचायती राज एक्ट तो है, मगर निर्वाचन के लिए अभी नियमावली नहीं बनी है। शासन ने न्याय विभाग से परामर्श के बाद इस सिलसिले में राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र भी भेज दिया है। इसके साथ ही जिलाधिकारियों को एक अगस्त से पंचायतों में आरक्षण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड में उप्र के पंचायतीराज एक्ट व नियमावली के तहत ही पंचायत चुनाव संपन्न कराए जा रहे थे।लंबे इंतजार के बाद 2016 में राज्य का पंचायती राज एक्ट अस्तित्व में आया। हाल में एक्ट में संशोधन किया गया। इसमें यह प्रावधान किया गया कि दो से अधिक बच्चों वाले लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसके साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों के लिए शैक्षिक योग्यता का निर्धारण भी किया गया है। इस बीच पड़ताल हुई तो बात सामने आई कि राज्य ने अपना नया एक्ट तो तैयार कर लिया है, मगर चुनाव के लिए नियमावली नहीं बनाई है। साथ ही आरक्षण के फार्मूले के बारे में उल्लेख नहीं है। वहीं, हाईकोर्ट ने भी एक मामले में सरकार को चार माह के भीतर पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए। 

खत्‍म हो चुका है ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 
हरिद्वार को छोड़ बाकी जिलों में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 14 व 15 जुलाई को खत्म हो चुका है, जबकि क्षेत्र पंचायतों का नौ अगस्त और जिला पंचायतों का कार्यकाल 12 अगस्त को समाप्त होना है। 

पंचायत कार्मिकों की छुट्टियां रद 
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनजर इससे संबंधित कार्यों में कोई अड़चन न आए, इसके लिए पंचायतीराज विभाग के कार्मिकों की छुट्टियां रद कर दी गई हैं। सचिव पंचायतीराज डॉ.रंजीत कुमार सिन्हा की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि पंचायतीराज निदेशालय, पंचायतीराज कार्यालय, समस्त अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत एवं समस्त जिला पंचायतीराज अधिकारी कार्यालयों के अधिकारियों-कर्मचारियों को अति अपरिहार्य स्थिति को छोड़कर अवकाश निरस्त किए गए हैं। चुनाव संपन्न होने तक किसी भी अधिकारी व कर्मचारी को अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। अन्यथा की स्थिति में वेतन कटौती के साथ ही अन्य कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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