पिथौरागढ़, प्रमोद भट्ट : भारत से तनातनी के बीच नेपाल अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। पहले तो लॉकडाउन की आड़ में उसने सीमा पर अस्थायी बंकर बनाया और अब भारतीय सीमा तक चीन की पहुंच आसान करने के लिए महाकाली कॉरिडोर पर तेजी दिखा रहा है। इसके लिए 2017 से ही लंबित परियोजना के लिए रविवार को उसने 90 करोड़ रुपये जारी कर दिए।

 

नेपाल के कंचनपुर जिले के ब्रह्मदेव से चीन सीमा टिंकर तक 426 किमी लंबी प्रस्तावित परियोजना के पहले चरण में 115 किमी सड़क की कटान पूरी हो गई है। अब 311 किमी पर काम होना है। निर्माण पूरा होते ही भारतीय सीमा तक चीन की पहुंच आसान हो जाएगी। किसी भी आपात स्थिति में चीन इस मार्ग का प्रयोग कर सकता है।

 

महाकाली कॉरिडोर का शुभारंभ 2015 में हुआ था। नेपाल सरकार इस परियोजना पर 1.44 अरब की धनराशि खर्च कर चुकी है। निर्माण कार्य सड़क विभाग महाकाली कॉरिडार आयोजना कार्यालय की देखरेख में हो रहा है। इसके तीन कार्यालय महेंद्र नगर, बैतड़ी और दार्चुला जिले में हैं। दार्चुला सड़क विभाग के अभियंता दिनेश रेखौल ने बताया कि महाकाली कॉरिडोर के लिए सरकार ने धन जारी किया है। तीन वर्ष में काम पूरा कर लिया जाएगा।

 

कॉरिडोर का सामरिक महत्व

महाकाली कॉरिडोर के तहत सड़क निर्माण के बाद से नेपाल के क्षेत्र नंबर 7 के कंचनपुर से दार्चुला की दूरी काफी कम हो जाएगी। प्रस्तावित पंचेश्वर डैम के किनारे सड़क बनने से महाकाली अंचल के लोगों को सीधी टू लेन सड़क पर सफर करने में आसानी होगी। इसके साथ ही चीन का भारत में प्रवेश का रास्ता और नजदीक हो जाएगा। ऐसे में प्रतिकूल हालात में नेपाल सरकार के चीन की ओर रुख से वह भारत के समक्ष सामरिक चुनौती पेश कर सकता है।

 

कम होगी दार्चुला से ब्रह्मदेव की दूरी

सड़क की चौड़ाई 12 मीटर रखी गई है। निर्माण कोरिया की तकनीक से होगा। सड़क के बनने से बैतड़ी जिले के लोगों को नेपाल के ब्रह्मदेव जाने में केवल तीन घंटे का समय लगेगा। वहीं, दार्चुला से ब्रह्मदेव की 291 किमी की दूरी पांच घंटे में तय हो जाएगी। वर्तमान में इस दूरी को तय करने में 10 घंटे लगते हैं।

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