जागरण संवाददाता, अल्मोड़ा : कोरोना से जंग के बीच फायर सीजन में वनाग्नि भी बड़ी चुनौती बन गई है। बेकाबू होती लपटों के बीच हालिया वन क्षेत्रों का जायजा लेने पहुंचे पीसीसीएफ राजीव भरतरी के आग्रह पर केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ के जवानों की टुकड़ी उपलब्ध करा दी है। ताकि जंगलात के साथ जैवविविधता, पारिस्थितिकी व अन्य संपदा को लपटों से बचाया जा सके। साथ ही स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे विभाग को इससे बड़ा सहारा मिला है।

पर्वतीय क्षेत्रों में हालात विकट होने पर सप्ताह पूर्व विभाग प्रमुख भरतरी ने बिनसर वन्यजीव अभयारण्य के तमाम कंपार्टमेंट व बीटों का स्थलीय निरीक्षण किया था। डीएफओ रिजर्व महातिम सिंह यादव व सिविल सोयम आरसी कांडपाल आदि से फीडबैक लेने के बाद पीसीसीएफ ने मौजूदा हालात से जूझने के लिए केंद्र से अल्मोड़ा व बागेश्वर जनपद के लिए एनडीआरएफ की टुकड़ी भेजने का आग्रह किया था। इधर 11वीं बटालियन वाराणसी के 30 सदस्यीय दल ने मोर्चा संभाल लिया है।

डीएफओ ने किया ब्रीफ, तकनीकी प्रशिक्षण दिया

डीएफओ महातिम सिंह यादव ने मंगलवार को एनडीआरएफ जवानों के साथ ही वन रक्षकों को ब्रीफ किया। अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में आग पर काबू पाने के तौर तरीकों का डेमो भी कराया गया। बिनसर अभयारण्य, कफड़खान धौलछीना रोड पर आरक्षित वन क्षेत्र के पतलिया नैल बीट आदि क्षेत्रों में सड़क के दोनों तरफ फायर लाइन काटने का प्रशिक्षण दिया गया। डीएफओ महातिम खुद भी वनाग्नि नियंत्रण के लिए कर्मियों के साथ वन क्षेत्रों के दौरे पर जुटे हैं।

खेतों में भी कुछ जलाया तो मुकदमा

डीएफओ महातिम सिंह यादव ने कहा कि वनाग्नि पर नियंत्रण को अब कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने ग्रामीणों से वनों को बचाने व आग बुझाने में सहयोग की पुन: अपील की। साथ ही दो टूक चेताया कि यदि किसी ग्रामीण ने अपने निजी खेत में भी खरपतवार जलाया तो सीधे मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उन्होंने वन क्षेत्राधिकारियों से नियमित दौरा कर जंगलात से सटे गांवों की निगरानी के निर्देश दिए। यह भी कहा कि जंगलों को क्षति पहुंचाने वालों पर एफआइआर कराएं।

पीसीसीएफ की पहल पर एनडीआरएफ की टुकड़ी मिली 

डीएफओ महातिम सिंह यादव ने बताया कि पीसीसीएफ की पहल पर हमें एनडीआरएफ की टुकड़ी मिल गई है। इससे बड़ी मदद मिलेगी। स्टाफ कम है और वन क्षेत्र बड़ा। इस परेशानी को विभाग प्रमुख ने बखूबी समझा। इसीलिए केंद्र से टुकड़ी मांगी। एनडीआरएफ के अपने वाहन हैं। जिला आपदा कोष से पेट्रोल का खर्च वहन किया जाएगा। उन्हें विषम भौगोलिक हालात वाले पर्वतीय क्षेत्रों में वनाग्नि नियंत्रण का तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया।

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