हल्द्वानी, जेएनएन : शारदीय नवरात्र 29 सितंबर से शुरू होंगे। इस बार यह पूरे नौ दिन का पर्व रहेगा। घट स्थापना सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग में होगी। ज्योतिषविदों के अनुसार, देवी हाथी पर सवार होकर आएंगी, जिसे धन और ऐश्वर्य का प्रतीक माना गया है। नवरात्र के शुभारंभ में हस्त नक्षत्र, ब्रह्मा योग, कन्या राशि के चंद्रमा व कन्या राशि के ही सूर्य होंगे। इस राशि का स्वामी बुध है, इसलिए देश-दुनिया के लिए यह देवी पर्व शुभ रहने वाला है।

श्री महादेव गिरि संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी के अनुसार, चैत्र व आश्विन के नवरात्र प्रमुख माने गए हैं। आषाढ़ व माघ के नवरात्र गुप्त नवरात्र के नाम से जाने जाते हैं। इनमें शारदीय नवरात्र साधना करने के अलावा लोक परंपराओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होते हैं।

मध्याह्न तक घट स्थापना का मुहूर्त

डॉ. नवीन चंद्र जोशी के मुताबिक, कलश स्थापना के लिए प्रात:काल सूर्योदय से मध्याह्न काल तक अभिजित मुहूर्त है। ब्रह्मकाल में घट स्थापना सर्वश्रेष्ठ बताई गई है। प्रात:काल मंगलस्नान कर पंचदेव कर्म करें। गणेश पूजन, मातृ पूजन, पुण्य वाचन के बाद घट स्थापना कर हरेला बोएं। घट स्थापना में स्वर्ण, चांदी या धातु निर्मित देवी की मूर्ति रखनी चाहिए।

श्रीराम ने की थी देवी भगवती की उपासना

श्रीमद्भागवत पुराण के मुताबिक, शारदीय नवरात्र में भगवान श्रीराम ने नवदुर्गा रूप भगवती का नौ दिनों तक पूजन किया था। मां भगवती की अपराजिता शक्ति से ही उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त की थी।

त्योहार के लिए सजा बाजार

त्योहार को देखते हुए बाजार सजने लगा है। शोरूम, मॉल आदि सजाए जा रहे हैं। शनिवार को बंदी का दिन होने के बावजूद बर्तन, ज्वैलरी व पूजा सामग्री की कई दुकानें खुली रहीं। हालांकि श्राद्ध पक्ष होने से खास खरीदारी नहीं हुई। व्यापारी नेता व बर्तन कारोबारी राजीव अग्रवाल ने बताया कि नवरात्र शुरू होने के साथ बाजार में तेजी की उम्मीद लगाए हुए हैं।

यह भी पढ़ें : सामूहिक तर्पण, भोज व पौधरोपण के साथ पितृ पक्ष का समापन

Posted By: Skand Shukla

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप