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25 लाख रुपए की जमापूंजी से जमीन खरीदी... बनाया स्कूल, संवर रहा 400 से ज्यादा गरीब बच्चों का भविष्य

Published: Sat, 05 Sep 2026 12:55 PM (IST)

शिक्षक नवेंदु मठपाल ने अपनी जमापूंजी से 25 लाख रुपये लगाकर गरीब बच्चों, खासकर बुक्सा समाज के लिए रामनगर में ...और पढ़ें

रचनात्मक शिक्षण मंडल के बैनर तले शिक्षक नवेंदु मठपाल ने छेड़ा शिक्षा जागृति का अभियान.

रचनात्मक शिक्षण मंडल के बैनर तले शिक्षक नवेंदु मठपाल ने छेड़ा शिक्षा जागृति का अभियान.

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सुमित जोशी, हल्द्वानी । शिक्षक सूर्य की उस किरण भांति होते हैं जो अज्ञानता का अंधकार दूर कर जीवन को ज्ञान की रोशनी से प्रकाशमान कर देते हैं। विद्यार्थियों का भटकाव दूर कर उन्नति का पथ दिखाते हैं। कई बच्चे घरेलू परिस्थितियों के कारण पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं। राष्ट्र के ऐसे कर्णधारों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की जिम्मेदारी सरकार के साथ ही गुरुजनों और पूरे समाज की है।

रामनगर के जीआइसी ढेला में अंग्रेजी के प्रवक्ता नवेंदु मठपाल इस सामाजिक दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने बुक्सा समाज के गरीब बच्चों के लिए अपनी जमापूंजी से 25 लाख रुपये लगाकर जमीन खरीदी और उस पर 30 जनवरी से विद्यालय शुरू किया है।

सांवल्दे गांव में स्कूल खोला गया है। जिसमें रचनात्मक शिक्षण मंडल के बैनर तले सायंकालीन कक्षाओं का निश्शुल्क संचालन हो रहा है। इसमें 100 से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। नवेंदु की पहल से जुड़कर सरकारी स्कूलों और कालेज के शिक्षक भी इन बच्चों को पढ़ाकर उनके जीवन में ज्ञान का दीपक जला रहे हैं।

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पुछड़ी में ज्योतिबा फुल और सावित्रीबाई फुल स्कूल चल रहा

रचनात्मक शिक्षण मंडल नवेंदु मठपाल के निर्देश में गरीब बच्चों के लिए दो सायंकालीन स्कूल पहले से चला रहा है। अक्टूबर 2020 में कोसी में आई बाढ़ के बाद प्रभावित हुए श्रमिक परिवार के बच्चों के लिए समाज के सहयोग से ज्योतिबा फुले सायंकालीन स्कूल की नींव रखी गई। 26 नवंबर 2020 को संविधान दिवस पर स्कूल आरंभ हुआ।

वहीं, जनवरी 2021 में पटरानी गांव में सावित्रीबाई फुले सायंकालीन स्कूल शुरू किया। इसमें बालिकाओं के लिए कंप्यूटर प्रशिक्षण भी प्रांरभ हुआ। सांवल्दे, पुछड़ी और पटरानी के तीन स्कूलों में 400 से अधिक गरीब परिवारों के बच्चे निश्शुल्क शिक्षा ले रहे हैं।

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शिक्षा के अलख जगा 200 बच्चे स्कूल भेजे

शिक्षकों के समूह ने पढ़ाई से वंचित बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ परिवारों को भी प्रेरित किया। शिक्षा की अलख जगाई तो छह वर्षों में सायंकालीन स्कूलों से जुड़े करीब 200 बच्चों का सरकारी स्कूलों में प्रवेश करवाया। ऐसे बच्चे आज सुबह विद्यालय जाते हैं और शाम को सायंकालीन स्कूल भी आते हैं। जहां उनके लिए समय-समय पर रचनात्मक गतिविधियों और कार्यशालाएं भी होती हैं।