'कभी डांट, कभी दुलार तो कभी अनसुनी कहानियां': स्कूल के दिनों में ले जाएंगे ये 7 अलग-अलग अंदाज वाले टीचर्स
शिक्षक दिवस पर आज बात करते हैं उन टीचर्स के बारे में जिनका अंदाज ही एकदम निराला था।

स्कूल के दिनों में ले जाएंगे ये अलग-अलग अंदाज वाले टीचर्स (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। टीचर्स डे के दिन स्कूल की यादें जैसे ही मन के पटल पर उभरने लगती हैं तो वो चेहरे भी याद आने लगते हैं जिन्होंने हमें लिखना-पढ़ना और बोलना सिखाया। कभी इंग्लिश वाली मैडम का ऐक्सेन्ट याद आता है तो कभी पीटीआई टीचर की डांट। चलिए आज हर स्कूल में मिलने वाले ऐसे ही अलग-अलग टाइप के टीचर्स के बारें में बात करते हैं।
द स्टोरीटेलर
हर क्लास में आज भी एक ऐसा टीचर जरूर होता है, जिसके पास दुनियाभर की कहानियां हैं। फिर चाहे टॉपिक साइंस, हिस्ट्री या हिन्दी का ही क्यों न हो, उनके पास हर बात को कहानियों में कहने का जो टैलेंट होता है, वो वाकई में तारीफ के काबिल है।
स्ट्रिक्ट और डिसिप्लिन सिखाने वाले
आजकल सोशल मीडिया पर हम जिस ऑरा की बात कर रहे हैं, वो तो स्कूल में स्ट्रिक्ट और डिसिप्लिन सिखाने वाले टीचर का होता था। जिनके एंट्री लेते ही मछली बाजार बनी क्लास में पिन ड्रॉप साइलेन्स हो जाता था। हां, हर बात पर डांट बहुत पड़ती थी लेकिन उनकी बातों का मोल बड़े होकर समझ में आया।
पी.टी. सर
ग्राउंड में हर समय सीटी बजाकर बच्चों को अनुशासित करने वाले पीटी सर की याद हर किसी को आती होगी, क्योंकि पूरे दिन पढ़ाई करने के बाद जब बीच में पीटी पीरियड आता था तो लगता था जैसे जेल से आजादी मिल गई हो। बच्चे भी बहाने से ग्राउंड में जाने की फिराक में रहते थे।
बच्चों के फेवरेट टीचर
हम सभी का कोई न कोई फेवरेट टीचर जरूर रहा होगा, जिससे हमने अपने मन की बात शेयर की होगी और उनसे खूब अटेन्शन भी पाई होगी। ये वो टीचर थे जिनका पीरियड कितना भी लंबा हो जाए फिर जैसे ही टीचर डे आता था हम एक गुलाब के फूल के साथ डायरी और पेन तैयार रखते थे, क्यों सही कहा न?
एंग्री टीचर
फिर आते हैं वो टीचर जिनका गुस्सा ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। क्लास के बच्चों में डर इतना था कि जिसने होमवर्क नहीं किया होता था उसके पास छुट्टी लेने के सिवा कोई ऑप्शन ही नहीं रहता था, क्योंकि उनके सामने बहाने बनाना मतलब सजा के लिए तैयार रहना।
सीनियर पर भुलक्कड़ टीचर
सीनियर टीचर जिनके पास अनुभव ज्यादा होते थे और हर समय वो अपनी रिटायरमेंट की बातें करते थे। फिर उनका बीच-बीच में पढ़ाते हुए भूल जाना आखिर कौन भूल सकता है?
इंग्लिश वाली मैडम
हम टीचर्स के अलग-अलग टाइप में इंग्लिश वाली मैडम की बात न करें, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। उनके ऐक्सेन्ट और फ्लो को देखकर ही बच्चे इंप्रेस हो जाते थे, भले ही उनका कहा बाद में समझ में आया हो।
