नैनीताल और ऊधम सिंह नगर के तराई के जंगलों में बाघों की बढ़ती मौजूदगी, गणना के लिए 70% अधिक कैमरे लगाए गए
तराई के जंगल बाघों के लिए पसंदीदा आवास बन गए हैं, जहाँ शिकार और पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। इस ...और पढ़ें

तराई पूर्वी डिवीजन की गौला रेंज के अन्तर्गत टीला बीट में बाघ गणना के लिए कैमरा ट्रैक लगाते वनकर्मी। सौजन्य वन विभाग

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। तराई के जंगल बाघों के पसंदीदा आवास बन रहे हैं। यहां शिकार और पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। साथ ही बाघों के छिपने के लिए अनुकूल वातावरण भी है।
इस वजह से तराई के जंगलों में उन जगहों पर भी बाघों की मौजूदगी देखी जा रही है, जहां पहले आम तौर पर बाघ नजर नहीं आते थे।
यही वजह है कि इस वर्ष की अखिल भारतीय बाघ गणना के दौरान तराई पूर्वी वन प्रभाग में इन जगहों को भी कवर किया जा रहा है।
अपनी जैव विविधता के लिए मशहूर तराई पूर्वी वन प्रभाग नैनीताल और ऊधम सिंह नगर जिले के अंतर्गत आता है। इन जंगलों में आवास करने वाले बड़े स्तनधारियों के आवास के लिए यहां अनुकूल परिस्थितियां हैं।
यही वजह है कि तराई पूर्वी वन प्रभाग में बाघों के क्षेत्र का विस्तार हुआ है। वन प्रभाग की डौली, गौला और बाराकोली रेंज में अब गश्त के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों को भी बाघ दिखाई देने लगे हैं।
ऐसे में इस वर्ष की बाघ गणना में ट्रैप कैमरों की संख्या लगभग 70 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है, ताकि नए क्षेत्रों में पहुंचे बाघों की संख्या भी गणना में आ सके। जहां 2022 की बाघ गणना में तराई पूर्वी वन प्रभाग की सभी नौ रेंज में 177 ग्रिड प्वाइंट पर 354 ट्रैप कैमरे लगाए गए थे।
अब इनकी संख्या बढ़ाकर 300 कर दी गई है, यानी 127 ग्रिड प्वाइंट बढ़ाए गए हैं। इस प्रकार इस बाघ गणना में 600 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं।
इस बार ट्रैप कैमरों की संख्या बढ़ाई गई है। पिछली बाघ गणना में तराई पूर्वी वन प्रभाग में 53 बाघ मिले थे, जिनमें दो युवा बाघ भी थे। तब लिंगानुपात दो मादा प्रति नर दर्ज किया गया था। इस बार बाघों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
- हिमांशु बागरी, डीएफओ
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