1880 में गई थी 151 लोगों की जान, क्या फिर नैनीताल में दोहराने वाली है 146 साल पुरानी त्रासदी?
Nainital Landslide Threat: नैनीताल पर 1880 जैसे बड़े भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है, जिसमें 151 लोगों की जान गई थी।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
निर्मला बोहरा, उत्तराखंड। Nainital Landslide Threat: नैनीताल का नाम लेने से ही दिल और दिमाग में सुंदर ताल और वादियों के नजारे ताजा हो जाते हैं। नैनीताल भारत के सबसे पसंदीदा हिल स्टशनों में भी शामिल है। लेकिन अब नैनीताल पर बड़े भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। ठीक वैसा ही भूस्खलन जो 1880 में हुआ था, जिसमें 151 लोगों की जान गई थी।
बेहद डराने वाले आंकड़े
ताजा रिसर्च में बेहद डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं। शोधकर्ताओं और भू विज्ञानियों के संयुक्त अध्ययन में सामने आया है कि नैनीताल की पहाड़ियों में भूगर्भीय हलचल से बड़ा खतरा मंडरा रहा है, 24.9% क्षेत्र अत्यधिक भूस्खलन जोखिम में है और 59.6% मध्यम जोखिम वाला है।
नैनीताल के अलग-अलग हिस्सों में जमीन की गति एक जैसी नहीं है। कहीं जमीन धंस रही है तो कहीं ऊपर उठ रही है। 2017 से 2024 के बीच यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सेंटिनल 1ए उपग्रह से आंकड़ों मिले हैं। इनका पर्सिस्टेंट स्कैटरर इंटरफेरोमेट्री (पीएसआइ) तकनीक से विश्लेषण किया गया, जिसमें यह निष्कर्ष सामने आया है।
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इस रिसर्च में बलियानाला क्षेत्र में जमीन के धंसने की दर करीब आठ से 10 मिलीमीटर प्रतिवर्ष दर्ज की गई है। शेर-का-डांडा क्षेत्र में जमीन के छह से आठ मिलीमीटर प्रतिवर्ष की दर से ऊपर उठने के संकेत मिले हैं।

1880 के भूस्खलन में गई थी 151 लोगों की जान
- 18 सितंबर, 1880 शनिवार का दिन था।
- दो दिन से लगातार बारिश के बाद मल्लीताल में भूस्खलन शुरू हो गया।
- मल्लीताल में कई इमारतें भूस्खलन की चपेट में आकर ढह गईं।
- भूस्खलन के मलबे से नैनादेवी मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया था। इस घटना में 151 लोगों की मौत हुई थी।
- मरने वालों में 108 भारतीय और 43 ब्रिटिश नागरिक शामिल थे।
नैनीताल में कब हुआ था पहला भूस्खलन?
साल 1867 में नैनीताल में पहला भूस्खलन चार्टन लॉज की पहाड़ी पर हुआ था। तब नैनीताल को बसे हुए कुछ साल ही बीते थे। तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर सर हेनरी रैमजे ने हिल साइड सेफ्टी कमेटी का गठन किया, जो नैनीताल के संवेदनशील इलाकों के बारे में जानकारी जुटाती थी।
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नैनीताल में भूस्खलन का इतिहास
- 1866 में आल्मा की पहाड़ी पर।
- जुलाई 1867 में नैनीताल क्लब क्षेत्र में।
- 21 जून 1988 को सीआरएसटी के ऊपर।
- 1888 में मल्लीताल में भूस्खलन।
- 1890 से पहले डीएसबी के समीप राजभवन रोड, ठंडी सड़क पर।
- 1924 अयारपाटा क्षेत्र में।
- 1888 में 28 अगस्त को नैना पीक व चायना पीक चट्टान दरकी।
- 1988 व 1987 चायना पीक पर।
