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नैनीताल की दरकती कृष्णापुर पहाड़ी के उपचार को विशेषज्ञ टीम पहुंची, दरकने से रोकने के लिए डीपीएआर की जाएगी तैयार

Published: Mon, 12 Oct 2026 05:57 PM (IST)

नैनीताल की कृष्णापुर पहाड़ी पर हुए भूस्खलन की रोकथाम के लिए उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर की टीम पहुंच ...और पढ़ें

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नरेश कुमार, नैनीताल। शहर की तलहटी पर स्थित बलियानाला से सटी कृष्णापुर की पहाड़ी पर कुछ समय पूर्व हुए भारी भूस्खलन की भी रोकथाम की जाएगी। सिंचाई विभाग के पत्राचार के बाद उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर के विशेषज्ञों की टीम नैनीताल पहुंच गई है।

टीम भूस्खलन के कारणों की जांच के साथ ही रोकथाम की डीपीआर बनाने के लिए विभिन्न अध्ययनों के साथ ही प्राथमिक रोकथाम के भी तरीके सुझायेगी। अपर सचिव ने भी टीम विशेषज्ञों व सिंचाई विभाग अधिकारियों के साथ बैठक कर जल्द इसको लेकर सर्वे कार्य पूरा कर प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिये है।

बता दें कि बीते वर्ष से ही कृष्णापुर की पहाड़ी खतरा बनी हुई थी। बीते वर्ष पहाड़ी पर बड़ी-बड़ी दरारें उभरने के बाद भी जिम्मेदारों ने सुध नहीं ली तो बीते माह पहाड़ी पर भारी भूस्खलन होने से सिंचाई विभाग द्वारा बनाया गये अस्थाई टिन शेड भी क्षतिग्रस्त हो गए थे।

मुद्दे को दैनिक जागरण ने प्रमुखता से उठाया तो सिंचाई विभाग की ओर से भी पत्राचार कर शासन को अवगत कराया था। जिसके बाद यूएलएमएमसी के विशेषज्ञों की टीम नैनीताल पहुंच गई है।

सोमवार को विशेषज्ञों ने भूस्खलन क्षेत्र का मौका मुआयना कर भूस्खलन के कारणों की जांच की। टीम एक सप्ताह में भूस्खलन के कारण, रोकथाम से पूर्व आवश्चयक सर्वे व डीपीआर निर्माण को लेकर प्लान मुख्यालय में सौंपेगी।

अपर सचिव ने विशेषज्ञों व सिंचाई विभाग अधिकारियों के साथ की बैठक

सोमवार को नैनीताल क्लब में अपर सचिव व यूएलएमएमसी के अपर महानिदेशक प्रकाश चंद्र ने विशेषज्ञों व सिंचाई विभाग अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने भूस्खलन व इसके संभावित नुकसान को लेकर विस्तार से जानकारी ली।

बैठक में पहुंची विधायक सरिता आर्य ने उनके समक्ष कृष्णापुर क्षेत्र के लोगों द्वारा बलियानाला से सड़क निर्माण की बात भी रखी। जिस पर उन्होंने विशेषज्ञों द्वारा सर्वे किये जाने के बाद ही कुछ स्पष्ट होने का आश्वासन दिया।

उन्होंने विशेषज्ञों को निर्देशित किया कि धरातल पर जाकर भूस्खलन का जायजा लेने के बाद आवश्यक सर्वे व उपचारात्मक तरीके बताए जाए। जिससे बजट की मांग कर रोकथाम की डीपीआर बनाई जा सके।

उन्होंने विशेषज्ञों को एक सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये। बैठक में यूएलएमएमसी के अधिशासी अभियंता शिवा, डिजाइन इंजीनियर भूपेंद्र कुमार, सहायक अभियंता प्रेम सिंह नेगी, सिंचाई विभाग अधिशासी अभियंता डीके सिंह समेत सिंचाई विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

विशेषज्ञों ने भी माना रोकथाम नहीं हुई तो बलियानाला के लिए भी खतरा बन सकता है भूस्खलन

अपर सचिव द्वारा बैठक लिये जाने के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि बीते माह हुआ भूस्खलन बलियानाला से महज 50 मीटर की दूरी पर है। ऐसे में यदि समय रहते रोकथाम नहीं की गई तो यह 298 करोड़ की लागत से किये जा रहे रोकथाम कार्यों के लिए भी खतरा बन सकता है। हालांकि उन्होंने भूगर्भीय सर्वे व भूस्खलन की प्रकृति को लेकर अध्ययन के बाद ही अन्य स्थिति स्पष्ट होने की बात भी रखी।

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