नैनीताल में पीलिया का प्रकोप, 10 हजार में 7 हजार इलाज पर
नैनीताल के ज्योलीकोट में जल जनित रोगों के कारण पीलिया का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे कई लोग प्रभावित हैं और इलाज पर भारी खर्च आ रहा है।


समय कम है?
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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी । मेरी दोनों बेटियों को पीलिया हो गया है। छोटी बेटी छह दिन बेस अस्पताल में भर्ती थी, जो सोमवार को डिस्चार्ज हुई। बड़ी बेटी की जांच रिपोर्ट आई तो पीलिया बढ़ा हुआ निकला, जिसे मंगलवार सुबह भर्ती कराया है।
साहब...मैं 10 हजार रुपये की नौकरी करता हूं, दोनों बेटियों के इलाज में सात हजार रुपये लग गए हैं। अब पूरे महीने का खर्चा जैसे तैसे निकालना पड़ेगा। यह दर्द ज्योलीकोट से आए संजय आर्या ने बयां किया। उनके बेटी जैसे अन्य लोग ज्योलिकोट से बेस अस्पताल में भर्ती हैं।
ज्योलीकोट में जल जनित रोग से फैले संक्रमण का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल में ज्योलिकोट से 11 मरीज यहां रेफर हुए हैं, जिन्हें आई ओपीडी के सामने अलग वार्ड में भर्ती किया है। इसमें ज्यादातर 18 से 24 साल के युवा हैं, जिनका पीलिया व लिवर संबंधित रोग का इलाज चल रहा है।
चोपड़ा गांव निवासी 17 वर्षीय दिव्यांशू जीना के स्वजन ने बताया कि वह बेस अस्पताल में पहले भर्ती थे, जिन्हें पांच सितंबर को डिस्चार्ज कराया था, लेकिन दोबारा उल्टी दस्त होने पर उन्हें सोमवार रात दोबारा भर्ती कराया है। इधर, उनके भाई गौरव जीना तीन अगस्त से बेस में भर्ती हैं। बताया कि उनका पीलिया कम नहीं हो रहा है।
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गेठिया से आई नेत्रा चौहान ने बताया कि दो दिन पहले बुखार आया था। जांच कराई तो पीलिया निकला, जिस पर उन्हें मंगलवार को बेस अस्पताल में भर्ती कराया है। उनकी माता विमला चौहान का कहना है कि गांव में पानी की जांच नहीं हो रही है। गंदा पानी आने से सभी को स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा लग रहा है।
आयुष्मान के बावजूद बाहर से लिख रहे दवाएं
बेस अस्पताल में भर्ती मरीजों के स्वजन ने बताया कि आयुष्मान योजना लगने से इलाज तो निश्शुल्क हो रहा है, लेकिन कुछ दवाएं डाक्टर बाहर की लिख रहे हैं। इससे इलाज का खर्च बढ़ ही जा रहा है। स्वजन बताते हैं कि उनके मरीज का स्वास्थ्य तेजी से ठीक नहीं हो रहा है। सभी लोग ज्योलीकोट क्षेत्र में आ रहे गंदे पानी से अक्रोश में हैं।
11 लोग ज्योलीकोट अस्पताल में भर्ती
नैनीताल: ज्योलीकोट क्षेत्र में जल जनित रोगों की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ड मोड पर है। सीएमओ डा.रश्मि पंत ने जिले के निजी चिकित्सालयों को जल जनित रोगों से संबंधित भर्ती मरीजों की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही आयुष्मान कार्ड के अंतर्गत भर्ती मरीजों की सूचना भी प्रतिदिन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। उधर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट में 92 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें से 11 लोगों को चिकित्सकीय निगरानी एवं उपचार के लिए भर्ती किया गया है।
सीएमओ ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट में निजी चिकित्सालयों के फिजिशियन एवं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट विशेषज्ञ चिकित्सकों की ओर से अपनी सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नौ सितंबर को नीलकंठ हॉस्पिटल, 10 सितंबर को उजाला सिग्नस, 11 सितंबर को साई हॉस्पिटल, 12 सितंबर को सिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, 13 सितंबर को चंदन हॉस्पिटल तथा 15 सितंबर को पुनः उजाला सिग्नस के विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं देंगे। सीएमओ ने क्षेत्रवासियों से विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं का लाभ लेने की अपील की है। किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी लक्षण होने पर उपचार में देरी न करें।
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उन्होंने बताया कि ज्योलिकोट क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीमों की ओर से 114 घरों का सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान जल जनित रोगों से बचाव को जागरूक करते हुए आवश्यक स्क्रीनिंग की गई। स्वास्थ्य शिविरों में 206 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक दवाएं दी गई।
इस दौरान जिला सर्विलेंस अधिकारी डा. मनोज कांडपाल, नोडल अधिकारी डा. हेमंत मर्तोलिया, स्वतिशील गुरानी, नंदन कांडपाल आदि उपस्थित रहे।
