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मां, भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से काटकर की थी हत्या, नैनीताल हाई कोर्ट ने रद की फांसी की सजा

Published: Thu, 15 Oct 2026 05:30 PM (IST)

नैनीताल हाई कोर्ट ने मां, भाई और गर्भवती भाभी की हत्या के दोषी संजय सिंह की फांसी की सजा रद्द कर दी है।

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने अपनी मां, बड़े भाई व गर्भवती भाभी की तलवार से काटकर निर्मम हत्या करने के अभियुक्त को विचारण कोर्ट से फांसी की सजा के मामले पर सुनवाई की।

न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने फांसी की सजा को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को अभियुक्त का मानसिक उपचार कराने के निर्देश दिए, और ठीक होने के बाद उसे रिहा करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मामले में सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

इस मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से सरकार से रिकार्ड का अवलोकन करने को कहा था, पूछा था कि क्या घटना के वक्त अभियुक्त किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त तो नही था। सजा सुनाते वक्त कोई तथ्य छूट तो नही गया।

फांसी की सजा दिए जाने के आधार पर उसकी मेडिकल स्थिति को जानने के लिए दुबारा से सुनवाई करने हेतु विचारण कोर्ट को रिफरेंस आदेश वापस भेजा था। विचारण अदालत ने मामले में फिर से सुनवाई करते हुए अभियुक्त को स्वस्थ बताते हुए फांसी की सजा को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त इस जघनय अपराध के लिए फांसी की सजा का हकदार है, क्योंकि उसने मां की कोख में पल रहे बच्चे सहित दो अन्य की तलवार से निर्मम हत्या की है।

यह था मामला

टिहरी गढ़वाल के गुमाल गांव निवासी संजय सिंह ने 13 दिसम्बर 2014 को मामूली बात में अपनी मां, बड़े भाई व गर्भवती भाभी की तलवार से काटकर हत्या कर दी थी। जिसकी रिपोर्ट अभियुक्त के पिता राम सिंह पवार ने दर्ज कराई थी अगस्त 2021 में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने अभियुक्त संजय सिंह तिहरे हत्याकांड का दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।

अभियुक्त की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गई। इस मामले में अभियुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद वशिष्ट को न्याय मित्र नियुक्त किया गया था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मृत्यु दंड की सजा पाया अभियुक्त मानसिक रूप से अस्वस्थ है।

मेडिकल बोर्ड ने भी उसे मानसिक रूप से बीमार बताते हुए कहा है कि अपने द्वारा किये जाने वाले कृत्य के परिणाम नहीं जानता है लेकिन वह इलाज के बाद ठीक हो सकता है लेकिन ट्रायल अदालत ने इस तथ्य को नजरअंदाज कर मृत्युदंड की सजा सुना दी।

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