जागरण संवाददाता, नैनीताल : हाई कोर्ट (Nainital High Court) ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 15 दिसंबर तक जीलिंग एस्टेट भीमताल (Jilling Estate Bhimtal) में सभी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने गूगल की तस्वीरों को देखने के बाद निर्देश जारी किए हैं, जिसमें विशेष रूप से 36 हेक्टेयर एस्टेट के 8.5 हेक्टेयर में निर्धारित मानको से कम हरियाली को दर्शाया गया है।

मामले में कोर्ट ने भौतिक निरीक्षण करने और सीमांकन कर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक सेवानिवृत्त आइएफएस अधिकारी विक्रम सिंह सजवाण को कोर्ट कमिश्नर के रूप में नियुक्त किया है। राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) को निर्देश जारी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया मूल्यांकन के लिए, निश्चित रूप से इन तस्वीरों पर ध्यान दे सकते हैं।

इन तस्वीरों से पता चलता है कि घने वृक्षों से आच्छादित क्षेत्र में भी विकासात्मक गतिविधि की गई है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में अतिरिक्त मुख्य स्थायी वकील प्रदीप जोशी ने बताया कि याचिकाकर्ता वीरेंद्र सिंह ने 1980 के दशक में जीलिंग एस्टेट को संपत्ति बेच दी थी और वह आस-पास के इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां भी कर रहा है।

जोशी ने साफ किया कि अगर वन क्षेत्र में कोई अनधिकृत गतिविधि की जाती है, तो वह शिकायत कर सकता है। याचिकाकर्ता बीरेंद्र सिंह ने पहले एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट से शिकायत की थी कि करीब 44 विला और हैलीपेड और रिसॉर्ट कॉटेज सहित अन्य संरचनाओं का निर्माण जीलिंग एस्टेट में किया जा रहा है।

जीलिंग एस्टेट के नए सिरे से निरीक्षण होना जरूरी

याचिकाकर्ता ने कहा कि स्टेट ने सक्षम अधिकारियों से अनुमति लिए बिना विकास गतिविधियों के लिए बुल्डोजर का उपयोग किया। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि स्टेट ने डीम्ड वन में विकास गतिविधियों को अंजाम दिया है, जिसमें 40 प्रतिशत से अधिक घने पेड़ हैं। पूरे जीलिंग एस्टेट के नए सिरे से निरीक्षण होना चाहिए। कोर्ट ने पीआइएल पर सुनवाई करते हुए 15 दिसंबर तक जीलिंग एस्टेट में सभी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 15 दिसंबर को नियत की गई है।

Edited By: Skand Shukla

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