जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : सरकार के नियमों के मुताबिक अगर अफसरों की तैयारी पूरी है तो एक अक्टूबर से नदियों से खनन शुरू हो सकता है, लेकिन वन विभाग और वन निगम की अधूरी तैयारियों व पानी की वजह से गौला अभी नहीं खुल पाएगी। ऐसे में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर गौला के जरिये रोजगार हासिल करने वाले करीब एक लाख लोगों को इंतजार करना पड़ेगा। जबकि कोरोना की दूसरी लहर से प्रभावित वाहन स्वामी व खनन कारोबारी भी गौला के जल्द खुलने की मांग कर रहे हैं।

शीशमहल से शांतिपुरी तक वाहन के अलावा बुग्गी गेटों के जरिये गौला से उपखनिज की निकासी होती है। 7500 वाहन पंजीकृत हैं। चालक, परिचालक, क्रशर कर्मचारी, स्पेयर पाट्र्स कारोबारी से लेकर मैकेनिक तक को आठ महीने चलने वाली गौला से रोजगार मिलता है। इसके अलावा बाजार का आर्थिक चक्र भी खनन पर निर्भर करता है। हालांकि, संपर्क मार्ग दुरुस्त करने, गेट पर संचालित कंप्यूटर कक्ष को व्यवस्थित करने, कांटों को ठीक करने के अलावा खाई भरान का काम अभी पूरा नहीं हुआ। इसके अलावा सीमांकन भी अधूरा है। ऐसे में हल्द्वानी से लेकर शांतिपुरी तक के लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

दो अरब तक राजस्व मिल चुका

रोजगार के साथ राजस्व देने में भी गौला का पूरे प्रदेश में रिकॉर्ड है। अन्य खनन नदियों से सरकार को इतना लाभ नहीं होता। पूर्व में गौला से दो अरब तक का राजस्व भी मिल चुका है। हालांकि, बीते कुछ सालों में बारिश की मात्रा घटने के कारण निकासी लक्ष्य प्रभावित हुआ। इस बार नदी में पानी को देखते हुए उम्मीद और बढ़ी है।

जल्द खनन सत्र का शुरू होना मुश्किल

गौला मजदूर संघर्ष समिति के अध्‍यक्ष राजेंद्र बिष्ट ने कहा कि गौला में खाई भरान, ऑफिस सिस्टम व्यवस्थित करने समेत अन्य काम अभी शुरू भी नहीं हुए। ऐसे में जल्द खनन सत्र का शुरू होना मुश्किल है। नदी खुलने पर लोगों को रोजगार मिलता। संघर्ष समिति के अध्यक्ष पम्मी सैफी का कहना है कि वन विभाग व वन निगम ने कभी समय से गौला को खोलने को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई। आगे श्रमिकों के न होने का बहाना बनाया जाएगा। ऐसे में नवंबर में ही नदी खुल पाएगी। एसडीओ वन विभाग डीएस मर्तोलिया ने बताया कि नदी में अभी पानी की मात्रा काफी है। जिस वजह से समय लग रहा है। उम्मीद है कि 15 अक्टूबर के बाद गौला खुल जाए।

 

Edited By: Skand Shukla

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