यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 22, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
क्राइम केस के आडियो-वीडियो की जांच के लिए अब कुमाऊं पुलिस को दिल्ली, चंडीगढ़ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे
विवादित और आपराधिक मामलों के साथ ही रिश्वत अपहरण और धमकी के आडियो और वीडियो की जांच के लिए अब ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, रुद्रपुर : विवादित और आपराधिक मामलों के साथ ही रिश्वत, अपहरण और धमकी के आडियो और वीडियो की जांच के लिए अब कुमाऊं मंडल की पुलिस को दिल्ली और चंडीगढ़ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। देहरादून विधि विज्ञान प्रयोगशाला में आवाज परीक्षण का कार्य शुरू हो गया है। इसके बाद लंबे समय से जांच रिपोर्ट न मिलने से अधर पर लटके आपराधिक वारदात की जांच में तेजी आएगी।
आपराधिक वारदात के बाद मौके पर पहुंची पुलिस अपराधियों तक पहुंचने के लिए साक्ष्य संकलन करती है। फारेंसिक की टीम भी मौके पर पहुंचकर वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने में पुलिस की मदद करती है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला में हुई जांच के बाद वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में फारेंसिंक टीम पुलिस की मदद करती है। इसके लिए उत्तराखंड में पहले देहरादून में विधि विज्ञान प्रयोगशाला खुला था, जिसके बाद वर्ष, 2015-16 में रुद्रपुर में विधि विज्ञान प्रयोगशाला खोला गया था।
बावजूद इसके कई जांच के लिए गढ़वाल मंडल पुलिस के साथ ही कुमाऊं मंडल के यूएस नगर, नैनीताल, चम्पावत, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ पुलिस को चंडीगढ़ और दिल्ली की लैब के चक्कर काटने पड़ते थे। इसमें रिश्वत, अपहरण और धमकी की आडियो और वीडियो की सत्यता की जांच पुलिस के लिए चुनौती पूर्ण था। इसके लिए पुलिस को अपहरण, रिश्वत और धमकी के आवाज और विजुअल की सत्यता जांचने के लिए आडियो और वीडियो को दिल्ली और चंडीगढ़ के लैब भेजना पड़ता था। साथ ही उसकी जांच रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था।
जांच रिपोर्ट मिलने में होने वाली देरी के चलते कई बार अपराधी पुलिस की पहुंच से दूर हो जाते थे। इसे देखते हुए पूर्व में देहरादून विधि विज्ञान प्रयोगशाला में आवाज परीक्षण का कार्य शुरू करने का प्रस्ताव बनाया गया था। प्रस्ताव को हरि झंडी मिलने के बाद देहरादून विधि विज्ञान प्रयोगशाला में आडियो और वीडियो की आवाज और विजुअल की जांच का कार्य शुरू हो गया है। इसके बाद उत्तराखंड एफएसएल वाइस एनालिसिस करने में आत्मनिर्भर हो गया है।
डीजीपी उत्तराखंड अशोक कुमार ने बताया कि विवादित और आपराधिक मामलों में धमकी, अपहरण और रिश्वत के लिए की गई काल की जांच के लिए पहले चंडीगढ़ और दिल्ली की लैब जाना पड़ता था। देहरादून विधि विज्ञान प्रयोगशाला में अब आडियो और वीडियो जांच शुरू कर दी गई है। विधि विज्ञान में शुरू हुई आवाज परीक्षण की जांच के बाद उत्तराखंड एफएसएल वाइस एनालिसिस करने में आत्मनिर्भर हो गया है।
