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Kumauni Bhasha Sammelan : फरवरी 1938 में प्रो. गोविंद बल्लभ पंत की पहली कुमाऊंनी कहानी हुई प्रकाशित
Kumauni Bhasha Sammelan 2022 राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन के दूसरे दिन कुमाऊंनी कथा निबंध नाटक व्यंग्य समालोचना बाल व अनुवाद ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन में शनिवार को कुमाऊंनी कथा, निबंध, नाटक, व्यंग्य, समालोचना, बाल व अनुवाद साहित्य पर चर्चा हुई। कुमाऊंनी कथा साहित्य यात्रा पर बात करते हुए डा. कुंदन रावत ने कहा कि फरवरी 1938 में पहली कुमाऊंनी कहानी प्रकाशित हुई थी। प्रो. गोविंद बल्लभ पंत लिखित ''एक रूपै चित्र'' कहानी अल्मोड़ा से प्रकाशित होने वाली अचल पत्रिका में छपी थी। पत्रिका के 21 अंक निकले और हर अंक में एक कहानीकार की कहानी प्रकाशित हुई।
कुमाऊंनी भाषा साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति व पहरू पत्रिका के प्रयास से पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच हीरानगर में आयोजित समारोह में डा. रावत ने कहा कि कुमाऊं में काथ यानी कथा कहने-सुनने की पुरानी परंपरा रही है। हालांकि आधुनिक कहानी से यह बहुत भिन्न हुआ करती थी। आधुनिक कुमाऊंनी कहानी लेखन का सिलसिला हिंदी कहानी की देखादेखी शुरू हुआ।
लेखक डा. प्रयाग दत्त पांडे व मथुरा दत्त मठपाल ने कहानीकारों पर अध्ययन किया है। डा. पांडे ने छितकू की कहानी को कुमाऊंनी की पहली कहानी बताया है। लेखक राम सिंह पांगती ने 1936 में इसे लिखा था। हालांकि इस कहानी को लक्ष्मण सिंह पांगती ने 2016 में प्रकाशित किया। वर्तमान में कई लोग इस दिशा में काम कर रहे हैं।

डा. प्रभा पंत ने स्मारक साहित्य, डा. दीपा गोबाड़ी ने कुमाऊंनी नाटक व व्यंग्य साहित्य, डा. हेम दुबे ने समालोचना, प्रो. गिरीश जोशी ने कुमाऊंनी शब्दकोश आदि विषय पर व्याख्यान दिया। संचालन डा. हयात रावत, डा. मनोज उप्रेती ने किया। एडवोकेट ललित मोहन सिंह जीना की पुस्तक दुदबोलि कर्ज का अतिथियों ने मंचन किया। यहां योगेंद्र जोशी, डा. चंद्रशेखर तिवारी, डा. नवीन लोहनी, डा. चंद्रशेखर पाठक, डा. बीएस बिष्ट, डा. कुंदन रावत, चारू तिवारी, आरजे काव्य, नरेंद्र बंगारी, दयाल पांडे, महेंद्र ठकुराठी आदि मौजूद रहे।
इन्हें मिला पुरस्कार व सम्मान
कृष्णानंद चंदोला व डा. अरुण प्रभा पंत को नेत्र सिंह रौतेला स्मृति कुमाउनी भाषा सेवी, जया डौर्बी को संस्कृति सेवी सम्मान दिया। देवकी नंदन कांडपाल को श्री गोलू देव साहित्य पुरस्कार, रमेश हितैषी को बहादुर बोरा श्रीबंधु कथा साहित्य पुरस्कार मिला।
कुमाऊंनी कविताओं से गूंजा मंच
दूसरे सत्र में कविता पाठ हुआ। जुगल किशोर पेटशाली की अध्यक्षता व डा. प्रदीप उपाध्याय के संचालन में शंकर दत्त जोशी, त्रिभुवन गिरि, विनोद पंत, गोपाल सिंह बिष्ट कलियुगी, मोहन जोशी, नंदा बल्लभ पांडे, तारा पाठक, डा. भगवती पनेरू, हेमंत बिष्ट आदि ने खुद की कविताएं पढ़ी।