हल्द्वानी, जागरण संवाददाता : किसान आंदोलन को एक वर्ष पूर्ण होने और कृषि कानूनों की वापसी की जीत पर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले विभिन्न किसान संगठनों बुद्ध पार्क में संयुक्त रूप से धरना दिया। वक्ताओं ने कहा कि, किसानों के दृढ़ संघर्ष ने खेत, खेती किसानी को बड़े पूंजीपतियों के हाथों में जाने से बचा लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार खेती किसानी सहित पूरे देश के सार्वजनिक संस्थानों को कॉरपोरेट जगत के हवाले करना चाहती है। किसान आंदोलन की जीत ने सरकार की मंशा पर लगाम लगाई है। यह जीत अपने हक और सम्मान के लिए आंदोलन कर रहे मजदूरों, छात्रों, बेरोजगारों के लिए भी बड़ी प्रेरणा का काम करेगी।

वक्ताओं ने कहा कि, आज संविधान दिवस के मौके पर इस जीत के बड़े मायने हैं। किसानों के संघर्ष ने भारत में संघर्ष के बल पर देश के लोकतंत्र और संविधान की जीत का नेतृत्व किया है। किसान आंदोलन की इस जीत के दूरगामी परिणाम आयेंगे। श्रम कोड के खिलाफ मजदूरों की लड़ाई और तेज़ होगी।धरने के माध्यम से मांग की गई कि, तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों की वापसी के साथ साथ किसानों की लाभकारी एमएसपी की गारंटी के लिए वैधानिक कानून बनाया जाय, स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप न्यूनतम समर्थन मूल्य को आवश्यक बनाया जाय, प्रस्तावित बिजली बिल वापस लिया जाय, लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड के मुख्य षड्यंत्रकर्ता केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी को बर्खास्त कर गिरफ्तार किया जाय, सभी आंदोलनकारी किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिये जाएं।

बुद्धपार्क में हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान विभिन्न किसान संगठनों, ऐक्टू, किसान महासभा, क्रालोस, जनवादी लोक मंच आदि आदि के सदस्य और पदाधिकारी मौजूद रहे। जिनमें ऐक्टू प्रदेश महामंत्री के के बोरा, किसान नेता बलजीत प्रधान, डॉ कैलाश पाण्डेय, वरिष्ठ समाजसेवी इस्लाम हुसैन, ललित मटियाली, मनोज पाण्डे, मोहन मटियाली, वेदप्रकाश शर्मा, देवेन्द्र रौतेला, हरेन्द्र क्वीरा, आनन्द सिंह दानू, कमल जोशी, निर्मला देवी, खीम सिंह, शेखर, रीता इस्लाम आदि शामिल हैं।

Edited By: Skand Shukla