संवाद सूत्र, कौसानी : चुनावी समर में वादों का दौर एक बार फिर से शुरू हो गया है। जबकि पिछले वादे अब भी अधूरे हैं। बागेश्वर जिले के कौसानी की चाय फैक्ट्री सालों से बंद पड़ी है। यहां कार्यरत करीब 50 कर्मचारी दर-दर भटक रहे हैं। उनकी सुध अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने नहीं ली है। आचार संहिता लगने के बाद लोग अब बंद पड़ी चाय फैक्ट्री को चुनावी मुद्दा बनाने पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने विधायक पर भी उपेक्षा का आरोप लगाया है।

2013-14 से कौसानी चाय फैक्ट्री बंद है। जिसका खामजियाजा यहां कार्यरत श्रमिकों और चाय बागाना वालों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार ने पलायन को रोकने की बात की। लेकिन छोटे और मझोले उद्योग बंद हैं। कौसानी आने वाले पर्यटकों के लिए चाय फैक्ट्री आकर्षण का केंद्र रही है। वह ग्री-टी यहां से खरीद कर भी ले जाते थे। जिससे स्थानीय चाय बागान वालों की रोजी-रोटी निकलती थी। चाय की भारत के कई राज्यों में मांग भी थी।

2017 के चुनाव से पहले विधायक ने चाय बागान श्रमिक, फैक्ट्री कर्मचारी और स्थानीय लोगों के साथ बैठक आयोजित की थी। जिस पर निर्णय लिया था कि चुनाव जीतने के बाद फैक्ट्री खोलने की कार्रवाई होगी। क्षेत्र के लोगों को भरोसा दिया गया। लेकिन उस पर पांच वर्ष बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सामाजिक कार्यकर्ता शिव सिंह नेगी, प्रमुख व्यापारी भानू नेगी, ग्राम प्रधान बच्चन आर्य ने कहा कि चाय फैक्ट्री की अनदेखी हुई है। खीम सिंह, किशन सिंह, हरीश सिंह आदि ने कहा कि जन सरोकारों से जनप्रतिनिधियों को कुछ लेना देना नहीं है। ऐसे में लोग पलायन को मजबूर हैं। वह चुनाव में चाय फैक्ट्री को मुद्दा बना रहे हैं। इधर, विधायक ने कहा कि चाय फैक्ट्री को खोलने के हरसंभव प्रयास किए गए। वह जारी रहेंगे।

Edited By: Skand Shukla