हल्द्वानी की रामलीला में अनूठी मिसाल, 30 साल से किरदार निभा रहे मुस्लिम कलाकार
काठगोदाम की रामलीला में हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है, जहां मुस्लिम कलाकार 30 वर्षों से रामकाज में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।


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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। काठगोदाम नगर निगम इंटर कालेज में चल रही रामलीला के मंच पर भारत की साझा संस्कृति की झलक दिखाई दे रही है। यहां मुस्लिम पात्र भी रामकाज में जुटे हैं और गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत तस्वीर पेश कर रहे हैं। ये पात्र हैं कतील अख्तर और बंटू रहमान।
परिवहन निगम से सेवानिवृत्त कतील अख्तर पिछले 30 वर्षों रामलीला में अलग-अलग किरदार निभा रहे हैं। इस वर्ष की रामलीला में वह मंथरा का पात्र खेलेंगे। वहीं इससे पहले वह बाणासुर, सबरी जैसे किरदार भी निभा चुके हैं। वह बताते हैं कि वह 15 वर्ष की उम्र से रामलीला से जुड़े हैं। यहां उन्हें अपनी प्रतिभा को दिखाने का अवसर मिलता है।
इसी तरह एडवोकेट बंटू रहमान भी रंगमंच से प्रभावित होकर इस वर्ष रामलीला में अभिनय करेंगे। वह खरदूषण का किरदार निभाएंगे। उन्होंने बताया कि रामलीला के मंच में मजहब की दीवारें पीछे छूट जाती हैं और संवादों में मर्यादा, समर्पण व भाईचारे के स्वर गूंजते हैं।

कतील अख्तर
12 साल की लक्षिता बनी हैं सीता
काठगोदाम की रामलीला दूसरी सबसे प्राचीन रामलीला है। यह 1950 में शुरू हुई थी। रामलीला समिति के अध्यक्ष संदीप राणा ने बताया कि पहली बार रामलीला में महिला किरदार महिला पात्र निभा रही हैं। सीता का किरदार 12 वर्षीय लक्षिता रेखाड़ी निभाएगी। इसी तरह कैकेयी, सुमित्रा समेत अन्य कुछ महिला किरदार भी महिलाएं ही निभा रही हैं।
पहली बार राम कुल का पात्र मिला
रामलीला से जुड़ा दिलचस्प तथ्य यह भी है कि 76 वर्षों के इतिहास में राणा परिवार ने हमेशा रावण कुल से जुड़े ही किरदार निभाए हैं, लेकिन पहली बार वे राम कुल का किरदार निभा रहे हैं। 11 वर्षीय मानस राणा शत्रुघ्न के पात्र में हैं।
