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Uttarakhand News : काठगोदाम-हैड़ाखान रोड पर पहाड़ी से आया मलबा, दो सौ गांवों से संपर्क कटा

Kathgodam Hairakhan road closed काठगोदाम थाने से दो किमी आगे रोड बरसात के दिनों भूस्खलन की चपेट में आ गई थी। चौड़ाई थोड़ा कम होने से छोटे वाहन एक-एक गुजरते थे। वहीं मंगलवार को फिर मलबा आने से रोड बंद हो गई।

By govind singhEdited By: Skand ShuklaPublished: Tue, 15 Nov 2022 06:42 PM (IST)Updated: Tue, 15 Nov 2022 06:42 PM (IST)
मंगलवार सुबह पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आया, रास्ता खोलने में जुटी मशीन

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : Kathgodam Hairakhan road closed : बरसात के दौरान आपदा की चपेट में आ चुकी काठगोदाम-हैड़ाखान रोड मंगलवार सुबह फिर बंद हो गई। पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर सडक पर गिर गया। यहां सड़क पहले से भी क्षतिग्रस्त थी।

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ग्रामीणों के अनुसार हैड़ाखान से लेकर रीठा साहिब तक मुख्य मार्ग से लगे करीब 200 गांवों के लिए यह मार्ग बेहद अहम है। इसके बंद होने से लोगों लंबी दूरी तय कर हल्द्वानी पहुंचना पड़ेगा। दूसरी तरफ मलबे को हटा मार्ग चालू कराने में जुटे लोनिवि अधिकारियों का कहना है कि उम्मीद है कि बुधवार शाम तक स्थिति सुधर जाएगी।

काठगोदाम थाने से दो किमी आगे जाने के बाद रोड बरसात के दिनों भूस्खलन की चपेट में आ गई थी। सड़क का कुछ हिस्सा भी खाई में समा गया था। चौड़ाई थोड़ा कम होने की वजह से छोटे वाहन भी इस हिस्से से एक-एक गुजरते थे। यानी जैसे-तैसे काम चल रहा था। लेकिन मंगलवार सुबह 50 मीटर ऊंचाई से पहाड़ी का बड़ा हिस्सा सड़क पर आ गया। जिस वजह से मार्ग पूरी तरह बंद हो गया।

बगैर बरसात की वजह से यह भूस्खलन हुआ है। शनिवार देर शाम आए भूकंप को भी इसकी एक वजह माना जा रहा है। क्योंकि, रविवार सुबह से यहां मिट्टी संग छोटे पत्थर गिर रहे थे। मामले को लेकर ईई प्रांतीय खंड लोनिवि नैनीताल दीपक गुप्ता ने बताया कि बुलडोजर और पोकलैंड सड़क खुलवाने में जुटी है। इस जगह पर पहाड़ी का स्थायी ट्रीटमेंट करना भी जरूरी है। इसलिए भू-विज्ञानियों का सर्वे भी कराया जाएगा।

काश्तकारों को आलू, नींबू और माल्टा की चिंता

हैड़ाखान क्षेत्र के रहने वाले और जमरानी बांध संघर्ष समिति के अध्यक्ष नवीन पलडिय़ा ने बताया कि इस समय में पहाड़ से आलू, माल्टा, नींबू और अदरक की फसल को बिक्री के लिए हल्द्वानी मंडी लाया जाता है। इस सड़क के बंद होने से किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। लंबी दूरी तय करने पर ज्यादा किराया लगेगा।


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