जागरण संवाददाता, रुद्रपुर : Police in Drug Smuggling : दवा कंपनी के प्रतिनिधि के बतौर कार्य करने वाले विपुल और पीयूष की बहुत जल्द पैसा कमा कर अमीर बनने की इच्छा थी। उन्होंने देहरादून में रेस्टोरेंट भी खोला, लेकिन उसमें घाटा हो गया। घाटे से उबरने के लिए उन्होंने काले सोने यानी चरस की तस्करी को तरक्की का मार्ग समझ लिया। तरक्की तो नहीं मिली दोनों अब सलाखों के पीछे जरूर पहुंच गए।

दवा कंपनी के एरिया मैनेजर के रूप में कार्यरत विपुल शैला व पीयूष खड़ायत दोनों साथ ही रहते हैं। दोनों के अंदर आगे बढऩे की ललक ने उनको जरायम की दुनिया की तरफ धकेल दिया। पहले उन्होंने सहीं रास्ते से मेहनत का मार्ग अपना कर पैसा कमाने का प्रयास किया। इसके लिए राजधानी देहरादून में उन्होंने रेस्टोरेंट खोला, लेकिन यह दाव उलटा पड़ गया। रेस्टोरेंट चलाने की ललक में वह कर्ज के दलदल में फंसते चले गए। सफलता की ललक में रेस्टोरेंट में घाटा खाने के बाद जब तक उनकी हिम्मत ने जवाब दिया वह गले तक कर्ज में डूब चुके थे। अब एक तरफ अमीर बनने की ललक और दूसरी तरफ कर्ज की मार से अपने आपको बचाने की ङ्क्षचता ने उनकी बुद्धि को ही कुंद कर दिया और अच्छे-बुरे काम के अंतर सोचे समझे बगैर वह जरायम की दुनिया में किस्मत आजमाने निकल पड़े। विपुल की दोस्ती कांस्टेबल प्रभात व दीपक के साथ थी। उनके साथ मिलकर उन्होंने काले सोने का कारोबार करने का मन बना लिया।

विपुल व पीयूष के अंदर तो बस पैसा कमाने की ललक थी, और वह जरायम की दलदल में फंसने का मन बना चुके थे लेकिन चरस की तस्करी का एक मार्ग जेल की तरफ भी जाता है शायद यह बात दोनों भूल गए और आखिर उनकी महत्वाकांक्षा उन्हें सलाखों तक ले गई।

तेजी से फैल रहा तस्करों का नेटवर्क

अभी तक यह देखा जाता रहा है कि यूएस नगर की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के जिलों के तस्कर चरस के साथ पकड़े जाते थे। तस्कर यूएस नगर के साथ पहाड़ में सप्लाई कर युवाओं को नशे की गर्त में धकेलते थे। अब इधर शनिवार को चम्पावत से करीब 20 लाख की चरस रुद्रपुर में खपाने में आए दो पुलिस कर्मियों समेत चार आरोपित तस्करी में पकड़े गए हैं। इससे साफ है कि तस्करी का नेटवर्क दिन पर दिन फैलता जा रहा है।

 

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Edited By: Prashant Mishra