नैनीताल, जागरण संवाददाता : अपनी ही एक माह की बच्ची के कत्‍ल के आरोप में जेल में बंद आरोपित मां निशा उर्फ ​​नगमा के अपराध को जघन्‍य मानते हुए हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी। अभियोजन के अनुसार 2019 में नगमा के खिलाफ बच्ची की हत्या के आरोप में धारा 302 एवं 201 आईपीसी के तहत थाना खटीमा, जिला उधमसिंह में मुकदमा रिपोर्ट दर्ज हुआ। निचली अदालत से जमानत नामंजूर होने के बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जमानत पर रिहा करने की मांग की है।

न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई हुई। सरकारी अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए बताया कि एक माह की बच्ची अचानक घर से गायब पाई गई थी। 16 दिसंबर 2019 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी कि किसी ने बच्ची को घर से उठा लिया है। नगमा ने तहरीर पुलिस को दी थी। जांच के दौरान पता चला कि नगमा ने ही बच्ची की हत्या की और सह-आरोपियों की मदद से उसे नहर में फेंक दिया था।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि घटना में सह-आरोपी विजय है, आरोपित पत्नी के चरित्र पर संदेह करता था। आरोपित महिला द्वारा हत्या का मारने का कोई सबूत नहीं नहीं है। कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। यह भी तर्क दिया कि व्यावहारिक रूप से यह संभव नहीं है कि एक मां छोटे बच्चे को मार डाले। जबकि सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि यह जघन्य अपराध है। आरोपित महिला को ही बताना है कि बच्ची की मृत्यु कैसे हुई और शव नहर में कैसे मिला। ट्रायल के दौरान तीन गवाहों से पूछताछ हो चुकी है। उन्होंने भी आरोप को सही ठहराया है।

एकलपीठ ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि निस्संदेह, यह प्रत्यक्ष साक्ष्य का मामला नहीं है। हालात हैं। महिला के पति द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, उनकी बेटी, जो एक महीने की थी, को आधी रात को उनके घर से किसी ने उठा लिया था। वह कैसे लापता पाई गई? उसे क्या हुआ? वह कैसे मरी? पोस्टमार्टम के अनुसार, हालांकि, मृत्यु के सही कारण का पता नहीं चल सका है। मां पर 30 दिन की बच्ची की हत्या का गंभीर आरोप है।

Edited By: Skand Shukla