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उत्तराखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: लोकसेवक पर एससी एक्ट में प्राथमिकी करने से पहले प्रशासनिक जांच जरूरी

Published: Thu, 18 Jun 2026 04:44 PM (IST)

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत लोक सेवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रशासनिक जांच अनिवार्य कर दी है।

उत्तराखंड हाई कोर्ट।

उत्तराखंड हाई कोर्ट।

HighLights

  1. लोकसेवकों पर एससी-एसटी एक्ट में जांच अनिवार्य

  2. हाई कोर्ट ने निचली अदालत का आदेश रद्द किया

  3. सीओ-एसओ के खिलाफ एफआईआर का निर्देश निरस्त

जागरण संवाददाता, नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया है।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक अब राज्य में किसी भी लोक सेवक के विरुद्ध इस अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने से पहले प्रशासनिक जांच करना अनिवार्य होगा।

न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने जिला एवं सत्र न्यायालय नैनीताल के करीब दो साल पहले के उस आदेश को निरस्त कर दिया।

जिसमें हल्द्वानी के तत्कालीन व वर्तमान में सितारगंज के सीओ भूपेंद्र सिंह धौनी व मुखानी थाने के तत्कालीन एसओ व वर्तमान में अल्मोड़ा में तैनात रमेश सिंह बोहरा के विरुद्ध प्राथतकी करने के आदेश पारित किए थे।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 4(2) के प्रविधानों के तहत किसी भी लोक सेवक के विरुद्ध कोई भी आरोप या मामला तब तक दर्ज नहीं किया जा सकता, जब तक कि किसी प्रशासनिक जांच में इसकी संस्तुति न की गई हो।

दरअसल, दो साल पहले हल्द्वानी की अनुसूचित जाति की महिला ने मुखानी थाने में एक व्यक्ति के विरुद्ध तहरीर दी थी। इसमें आरोप लगाया था कि युवक ने उसके साथ मारपीट की और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।

पुलिस ने प्रकरण की जांच की और पाया कि मामला भूमि विवाद का था। जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज नहीं की। जिसके विरुद्ध महिला की ओर से जिला एवं सत्र न्यायालय में परिवाद दाखिल किया गया।

जिसमें जिला जज की ओर से युवक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के साथ ही सीओ व एसओ के विरुद्ध भी एससी-एसटी एक्ट में प्राथतकी करने के आदेश पारित किए। इस आदेश को तत्कालीन सीओ व एसओ मुखानी की ओर से याचिका दायर कर हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि जिला जज की ओर से बिना प्रशासनिक जांच के मुकदमे दर्ज करने का आदेश विधि विरुद्ध के साथ ही एससी-एसटी एक्ट के नियम-चार के भी विरुद्ध है।

इसके अलावा यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के भी विरुद्ध है। कोर्ट ने सीओ व एसओ के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करने के आदेश को रद कर दिया।

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