नैनीताल, जागरण संवाददाता : हाईकोर्ट ने रोडवेज कर्मचारियों को पिछले छः माह से वेतन नहीं दिए जाने और अभी तक उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में रोडवेज की परिसम्पतियों का बंटवारा नहीं किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में रोडवेज कर्मचारी यूनियन याचिका पर वीसी के माध्यम से सुनवाई हुई। जिसमें वित्त सचिव अमित नेगी, परिवहन सचिव रंजीत सिन्हा नवनियुक्त महानिदेशक परिवहन नीरज खैरवाल पेश हुए। कोर्ट ने परिवहन सचिव भारत सरकार को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द उत्तर प्रदेश परिवहन सचिव की उत्तराखंड परिवहन सचिव से मीटिंग कराएं। जिससे दोनों राज्यों के बीच सम्पतियों का बंटवारा हो सके। केंद्र सरकार के अधिवक्ता एक सप्ताह के भीतर कोर्ट को बताएं कि कब तक दोनो प्रदेशों के परिवहन सचिवों की मीटिंग होगी।

दोनों राज्‍यों में एक ही पार्टी की सरकार, फिर भी नहीं सुलझ रहा मामला

परिवहन सचिव द्वारा कोर्ट को बताया गया कि सरकार द्वारा 34 करोड़ रुपया निगम के खाते में राज्य आकस्मिक निधि से ऋण के रूप में दिया जा रहा है, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है, आज निगम के खाते में जमा किया जा रहा है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने परिवहन सचिव केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे कि परिसम्पतियों के बंटवारे हेतु उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के सचिवों की बैठक करें। आज इस पर कोर्ट द्वारा पूछे जाने पर केंद्र सरकार की तरफ से कोई सन्तोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। कोर्ट ने कहा कि जब दो देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक होती है तो विदेश सचिवों की मुख्य भूमिका होती है, लेकिन यहां कोर्ट द्वारा बार बार आदेश देने के बात भी अभी तक मीटिंग नहीं हो पा रही है । मीटिंग करने में कहां समस्या आ रही है। कोर्ट ने यह तक कहा था कि जब केंद्र व दोनों राज्यों में सरकार एक ही पार्टी की है तो मामला एक बार आदेश करने पर सुलझ जाना चाहिए था।

कर्मचारियों को एसीपी, ग्रेच्युटी पीएफ भी नही दिया

परिवहन सचिव उत्तराखंड द्वारा शपथपत्र पेस कर कहा कि कर्मचारियों के भविष्य में वेतन देने के लिए वे सम्पूर्ण प्रपोजल केबिनेट के सामने रखेंगे। अभी लॉक डाउन खुल गया है। निगम पूर्व की भांति कार्य करने लगा है। इससे भी निगम की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा । कोर्ट ने सरकार द्वारा प्रदेश में लॉक डाउन 10 अगस्त तक बढाए जाने पर खुशी जाहिर की। यूनियन के अधिवक्ता द्वारा कोर्ट को बताया कि निगम द्वारा कर्मचारियों को एसीपी, ग्रेच्युटी पीएफ भी नही दिया जा रहा है जिसपर कोर्ट ने कहा कि यह मामला अलग है अभी तो वेतन दिए जाने की समस्या है। कर्मचारियों को कहाँ से वेतन दिया जाय। जनहित याचिका दायर कर कहा है कि सरकार उनके खिलाफ एस्मा लगाने जा रही है, जो नियम विरुद्ध है, सरकार कर्मचारियों को हड़ताल करने पर मजबूर करती आई है, सरकार व परिवहन निगम न तो संविदा कर्मचारियों को नियमित कर रही है, न उनको नियमित वेतन दिया जा रहा है, उनको पिछले चार साल से ओवर टाइम भी नहीं दिया जा रहा है, रिटायर कर्मचारियों के देयकों भुगतान नहीं किया गया

फिर भी सरकार एस्मा लगाने को तैयार

यूनियन का सरकार व निगम के साथ कई बार मांगों को लेकर समझौता हो चुका है, उसके बाद भी सरकार एस्मा लगाने को तैयार है। याचिका में कहा है कि सरकार ने निगम को 45 करोड़ रुपया बकाया देना है, वहीं उत्तर प्रदेश परिवहन निगम द्वारा भी निगम को 700 सौ करोड़ रुपया देना है। और ना तो राज्य सरकार निगम को उनका 45 करोड़ पर दे रही है ,वना ही राज्य सरकार उत्तर प्रदेश से 700 करोड़ रुपए की मांग कर रही है, जिस वजह से निगम ना तो नई बसे खरीद पा रही है, ना ही बस में यात्रियों की सुविधाओं के लिए सीसीटीवी समेत अन्य सुविधाएं दे पा रही है।

Edited By: Skand Shukla