विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हरिद्वार गंगा अवैध खनन मामला: हाई कोर्ट में सुनवाई अगले सप्ताह, पहले दिए थे कड़े आदेश

Published: Tue, 10 Feb 2026 05:16 PM (IST)

नैनीताल हाई कोर्ट ने हरिद्वार में गंगा नदी में हो रहे अवैध खनन के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई ...और पढ़ें

उत्तराखंड हाई कोर्ट

उत्तराखंड हाई कोर्ट

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने हरिद्वार में रायवाला से भोगपुर व कुंभ मेला क्षेत्र में गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध खनन के विरुद्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के लिए पूर्व में निर्धारित न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी व न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ में सुनवाई के लिए भेज दिया है। अब मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

पूर्व में पीठ ने आदेशों का अनुपालन नहीं करने पर नाराजगी व्यक्त की थी । कोर्ट ने कहा था कि पूर्व के आदेशों का अनुपालन नहीं करना और स्टोन क्रशरों का संचालन करना कानून का उल्लंघन है।

कोर्ट ने हरिद्वार में संचालित 48 स्टोन क्रशरों को तत्काल बंद करने व उनकी बिजली पानी के कनेक्शन काटने के आदेश जिलाधिकारी हरिद्वार व एसएसपी हरिद्वार को दिए थे।साथ ही एक सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को भी कहा था।

मंगलवार को मामला नामित पीठ के बजाय मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में लिस्टेड हुआ था।मातृ सदन हरिद्वार ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि हरिद्वार में रायवाला से भोगपुर के बीच गंगा नदी में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है।

जिससे गंगा नदी के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। गंगा नदी में खनन करने वाले नेशनल मिशन क्लीन गंगा को पलीता लगा रहे हैं।

जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की है कि गंगा नदी में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगाई जाए ताकि गंगा नदी के अस्तित्व को बचाया जा सके। अब खनन कुंभ अगले क्षेत्र में भी किया जा रहा है।

केंद्र सरकार ने गंगा नदी को बचाने के लिए एनएमसीजी बोर्ड गठित किया है। जिसका मुख्य उद्देश्य गंगा को साफ करना व उसके अस्तित्व को बचाए रखना है।

एनएमसीजी की ओर से राज्य सरकार को बार बार आदेश दिए गए कि यहां खनन कार्य नहीं किया जाय। उसके बाद में सरकार ने यहां खनन कार्य करवाया जा रहा है।

यूएन ने भी भारत सरकार को निर्देश दिए थे कि गंगा को बचाने के लिए क्या क्या कदम उठाए जा रहे। उसके बाद भी सरकार की ओर से गंगा के अस्तित्व को समाप्त किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें- हल्द्वानी क्रिकेट धोखाधड़ी: विकास ढाका की गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट में सुनवाई, नहीं मिली राहत

यह भी पढ़ें- शादी से इन्कार पर घर में घुसकर हत्या: हाई कोर्ट ने अभियुक्तों को नहीं दी कोई राहत