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उत्तराखंड के हल्द्वानी में भारत का पहला पॉलिनेटर पार्क, देखिए तितलियों और कीटों का अनोखा घर

Published: Thu, 24 Sep 2026 10:11 AM (IST)

हल्द्वानी में दिसंबर 2020 में भारत का पहला पॉलिनेटर पार्क स्थापित किया गया, जो एक हेक्टेयर में फैला है।

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। फूलों की पंखुड़ियों पर थिरकती रंग-बिरंगी रंगत, हवा में घुली मीठी महक और कानों में गूंजती मद्धम गुनगुनाहट... अगर आपको लगता है कि कुमाऊं का सफर सिर्फ पहाड़ों की चोटियों तक ही सीमित है तो जरा ठहरिए। नैनीताल जिले के हल्द्वानी यानी कुमाऊं के प्रवेश द्वार में तितलियों, भौरों, कीट-पतंगों की 40 से ज्यादा प्रजातियों की ऐसी दुनिया बसाई गई है, जिसे देखकर कोई भी ठिठक जाए। यहां एक हेक्टेयर में फैला है, भारत का पहला पॉलिनेटर पार्क।

दिसंबर 2020 में जब रामपुर रोड स्थित उत्तराखंड वन विभाग के अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी में यह पार्क खोला गया तो यह कुदरत के उन गुमनाम नायकों का आशियाना बना, जिनके बिना हमारी सांसें और थाली अधूरी हैं।

तितलियों और मधुमक्खियों के आशियाने को बुना वन अनुसंधान शाखा के तत्कालीन प्रमुख संजीव चतुर्वेदी ने तो इसे अपनी मेहनत से मूर्त रूप दिया तत्कालीन रेंजर मदन सिंह बिष्ट ने। उनका नजरिया साफ था, अगर फूलों को फल बनना है और इंसानों को जिंदा रहना है तो इन नन्हे प्राणियों को बचाना ही होगा। आखिर दुनिया की तमाम प्रमुख फसलों का वजूद भी इन्हीं के कंधों पर टिका है।

प्रमुख खाद्य फसलों के उत्पादन में भी पॉलिनेटर की भूमिका

इन पॉलिनेटर के चलते फूलदार पौधों में परागण होता है, जिससे उनके प्रजनन और नई पौध तैयार होने में मदद मिलती है। इसी तरह तमाम प्रमुख खाद्य फसलों के उत्पादन में भी पॉलिनेटर की भूमिका है। ऐसे में इनको प्राकृतिक वास मिले इसलिए यहां गुड़हल, सूरजमुखी, गेंदा, गुलाब, वाटर लिली समेत अन्य फूलदार पौधे लगाए गए हैं।

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यही नहीं तितलियों के बच्चों के लिए करी पत्ते और कैसिया के पत्ते लगाए गए हैं। पॉलिनेटर के लिए नमी वाली मिट्टी से मड पडलिंग का नायाब इंतजाम किया गया है। इससे वे नमक, सोडियम और अमीनो एसिड जैसे पोषक तत्व लेते हैं, जो उनके शरीर के विकास और प्रजनन में मददगार होते हैं।

वन अनुसंधान वृत्त में फारेस्टर कृष्णानंद पांडे बताते हैं कि इस पार्क में मृत पेड़ों को भी संजोकर रखा जाता है, क्योंकि वे पक्षियों और नन्हे कीटों की धरोहर हैं। लिया जाता है प्रवेश शुल्क रेंजर अशोक टम्टा बताते हैं कि पार्क की देखरेख के लिए विजिटर्स शुल्क रखा गया है। प्रति वयस्क 25 रुपये और 18 वर्ष से कम आयु वालों से 10 रुपये प्रवेश शुल्क लिया जाता है।

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